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भोपाल में नए नियम लागू, प्लॉट पर 12% ओपन स्पेस रखना होगा जरूरी

भोपाल भोपाल के मास्टर प्लान-2047 के प्रस्तावित ड्राफ्ट में शहर के विकास और नई कॉलोनियों के स्वरूप को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब किसी भी नई कॉलोनी में महज सड़क चौड़ी होने से कोई प्लॉट कमर्शियल नहीं मान लिया जाएगा। इसके लिए लेआउट में स्पष्ट मंजूरी लेनी होगी।…

भोपाल में नए नियम लागू, प्लॉट पर 12% ओपन स्पेस रखना होगा जरूरी

भोपाल
भोपाल के मास्टर प्लान-2047 के प्रस्तावित ड्राफ्ट में शहर के विकास और नई कॉलोनियों के स्वरूप को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब किसी भी नई कॉलोनी में महज सड़क चौड़ी होने से कोई प्लॉट कमर्शियल नहीं मान लिया जाएगा।

इसके लिए लेआउट में स्पष्ट मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, कॉलोनियों में हरियाली और बच्चों के लिए खेल मैदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खुली जगह (ओपन स्पेस) का दायरा भी 10% से बढ़ाकर 12% कर दिया है।

चौड़ी सड़क का मतलब सीधे कमर्शियल प्लॉट नहीं
    मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के अनुसार, नई कॉलोनियों में सड़क की चौड़ाई के आधार पर दुकान, ऑफिस, अस्पताल या मॉल खोलने की गुंजाइश तो दी है, लेकिन लेआउट पास करते समय ही यह तय करना होगा कि कमर्शियल या मिक्स लैंड यूज के प्लॉट कहां होंगे।

नई कॉलोनी में कुल आवासीय क्षेत्र के अधिकतम 5% हिस्से में ही स्थानीय जरूरतों वाली दुकानें खोलने की अनुमति होगी। हालांकि, अगर सड़क 18 मीटर या उससे अधिक चौड़ी है, तो इस 5% की सीमा के अलावा भी मिक्स लैंड यूज वाले प्लॉट मंजूर किए जा सकेंगे।
पहले से बसी पुरानी कॉलोनियों में सड़क की चौड़ाई के हिसाब से कमर्शियल गतिविधियों की छूट मिलेगी, लेकिन आवासीय परिसरों में गैर-आवासीय उपयोग स्वीकृत एफएआर (FAR) के अधिकतम 50% तक ही सीमित रहेगा।

हरियाली और खेल मैदानों पर विशेष जोर
नए प्रस्ताव में पर्यावरण और खुले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। नई कॉलोनियों में अब 12 प्रतिशत सामुदायिक खुली जगह छोड़ना अनिवार्य होगा, जिसमें से आधी जगह एक साथ (सिंगल पैच में) रखनी होगी। इस कुल खुले क्षेत्र का 30 फीसदी हिस्सा पेड़-पौधों के लिए और 30 फीसदी बच्चों के खेल मैदान के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा, सर्विस सुविधाओं के लिए अलग से 2% जमीन छोड़ना भी अनिवार्य किया गया है।

शहर के बाहर व्यक्तिगत मकान बनाने पर सख्त हुए नियम
    अक्सर लोग शहर के बाहर शांत इलाकों में बड़ी जमीन लेकर अपना अलग मकान बना लेते हैं, जिससे वहां सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का दबाव बढ़ जाता है। अब ऐसे व्यक्तिगत मकानों के लिए नियम सख्त कर दिए गए हैं।

    इनके लिए कम से कम 9 मीटर चौड़ी सड़क का होना जरूरी है। साथ ही अधिकतम 25% ग्राउंड कवरेज, 10 मीटर ऊंचाई और 1.25 एफएआर (FAR) का प्रस्ताव रखा गया है। मकान मालिक को यह भी स्पष्ट करना होगा कि उसकी जमीन किसी अवैध कॉलोनी का हिस्सा तो नहीं है।

    नक्शा पास कराते समय प्लॉट के चारों ओर छोड़ी जाने वाली जगह (मार्जिन) के नियमों में छोटे प्लॉट वालों को काफी राहत दी गई है है। 517 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सिर्फ सामने की तरफ 3 मीटर जगह छोड़नी होगी। पीछे या अगल-बगल कोई जगह छोड़ने की जरूरत नहीं है।

    517 से 1615 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सामने 3 मीटर और पीछे 1.5 मीटर जगह छोड़नी होगी। 1615 से 2422 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सामने 3 मीटर, पीछे 1.5 मीटर और एक तरफ 3 मीटर जगह छोड़नी होगी। इससे बड़े आकार (5382 वर्ग फीट तक) के प्लॉट्स के लिए साइज के हिसाब से चारों तरफ जगह छोड़ने के अलग-अलग नियम तय किए गए हैं।

दूसरी ओर, सामान्य आवासीय प्लॉट्स पर निर्माण की अच्छी छूट दी गई है। मसलन, 5000 वर्ग फीट के प्लॉट पर सभी मंजिलों को मिलाकर 7500 वर्ग फीट तक निर्माण किया जा सकता है। इसकी अधिकतम ऊंचाई 12.50 मीटर हो सकती है और इसमें ज्यादा से ज्यादा 6 फ्लैट बनाने की इजाजत होगी।

अतिरिक्त निर्माण के लिए टीडीआर (TDR) और शुल्क का फॉर्मूला
अगर कोई व्यक्ति तय सीमा से अधिक निर्माण करना चाहता है, तो उसे अतिरिक्त एफएआर का 50% हिस्सा शुल्क देकर और बाकी 50% हिस्सा टीडीआर (यानी दूसरे की जमीन से मिला निर्माण अधिकार) के जरिए हासिल करना होगा। वहीं, 12.50 मीटर तक की ऊंचाई वाले मकानों में एफएआर को 1.25 से बढ़ाकर 1.50 तक ले जाने के लिए पूरा अतिरिक्त अधिकार शुल्क देकर मंजूरी प्राप्त की जा सकती है।

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