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वोट बंटवारे से बचने की तैयारी, चंडीगढ़ चुनाव में कांग्रेस-AAP गठबंधन की चर्चा

चंडीगढ़  दिसंबर में प्रस्तावित चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच एक बार फिर गठबंधन की संभावना बनती दिखाई दे रही है। रविवार को कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति और पाॅलिटिकल अफेयर्स कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई। प्रदेश चुनाव समिति में नगर निगम चुनाव के लिए आप के…

वोट बंटवारे से बचने की तैयारी, चंडीगढ़ चुनाव में कांग्रेस-AAP गठबंधन की चर्चा

चंडीगढ़
 दिसंबर में प्रस्तावित चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच एक बार फिर गठबंधन की संभावना बनती दिखाई दे रही है। रविवार को कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति और पाॅलिटिकल अफेयर्स कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई।

प्रदेश चुनाव समिति में नगर निगम चुनाव के लिए आप के साथ गठबंधन के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बैठक में पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल, सांसद मनीष तिवारी सहित चुनाव समिति के सदस्य मौजूद रहे।

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में सदस्यों से सीधे पूछा गया कि क्या कांग्रेस को नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए।

चर्चा के दौरान अधिकांश सदस्यों ने गठबंधन के प्रस्ताव पर सहमति जताई। अब चुनाव समिति के सदस्यों की राय के बाद प्रस्ताव को पार्टी हाईकमान के समक्ष रखा जाएगा। अंतिम फैसला हाईकमान ही करेगा।

मालूम हो कि पंजाब विधानसभा से पहले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव होने हैं। साल 2024 का लोकसभा चुनाव भी चंडीगढ़ में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन के तहत ही लड़ा था जिस कारण कांग्रेस उम्मीदवार मनीष तिवारी भाजपा को काफी कम मार्जन से हराने में कामयाब हुए थे।

जबकि पंजाब में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। पिछले दो मेयर चुनाव भी कांग्रेस और आप एक साथ मिलकर लड़ चुके हैं ।ऐसे में अब फिर से गठबंधन होने पर भाजपा की राह मुश्किल हो जाएगी।

कांग्रेस के भीतर गठबंधन को लेकर मंथन की बड़ी वजह वर्ष 2021 का नगर निगम चुनाव है। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव लड़ा था और 35 में से 14 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

कांग्रेस को आठ सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा ने 12 और शिरोमणि अकाली दल ने एक सीट जीती थी ।कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 2021 में भाजपा और कांग्रेस के बीच परंपरागत मुकाबला आप के मैदान में उतरने के बाद त्रिकोणीय हो गया था।

आप को मिले वोटों का एक हिस्सा ऐसा था, जो विपक्षी वोट के रूप में कांग्रेस के खाते में जा सकता था। कांग्रेस का मानना है कि इस बार तीनों दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने पर फिर से विपक्षी वोटों का बंटवारा हो सकता है।

इस बैठक में पार्टी के प्रमुख रजनी पाटिल, सांसद मनीष तिवारी समेत चुनाव समिति के अन्य प्रमुख सदस्य उपस्थित थे। यह स्पष्ट हुआ कि एकसाथ खड़े होने से ना केवल वोटों का उलझन भंग होगा बल्कि भाजपा की सत्ता-धारण की राह पर भी गहरा असर पड़ेगा। पिछले 2021 के नगर निगम चुनाव की याद ताजा करते हुए यह कहा जा सकता है कि तब भी आम आदमी पार्टी ने पहली बार नगर निगम में भाग लेकर 14 वार्ड जीत कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। कांग्रेस को मात्र आठ सीटें मिलीं और भाजपा एवं शिरोमणि अकाली दल ने क्रमशः बारह और एक-एक सीट जीती। उस समय यह स्पष्ट था कि विपक्षी दलों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण वोट शेयरों का बंटवारा भड़कर हुआ था। उसी तर्क को आज के दौर में उभारा गया है कि यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं तो फिर से वोटों का विखंडन हो सकता है और परिणामस्वरूप भाजपा आसान जीत का दावा कर सकती है। विगत वार्षिक चुनावों में देखा गया कि जब दोनों दल एक साथ खड़े हुए थे, या कुछ प्रमुख वार्ड्स में गठबंधन के बाद हों थे, तो उन्हें काफी मजबूती मिली। 2021 के चुनाव में कुल 29.

79 प्रतिशत वोट कांग्रेस को मिले, इसके बाद भाजपा के 29.30 प्रतिशत व आम आदमी पार्टी के 27.08 प्रतिशत वोट थे। इसके अतिरिक्त निर्दलीय उम्मीदवारों को 7.10 प्रतिशत और अन्य दलों को 6.26 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस वफादार चेहरे अब इस गठबंधन के तहत नई टिकट रणनीति अपनाने को तैयार हैं और अपने दल बदलों के अनुभव से सबक लेकर विजयी मार्ग पर अग्रसर हैं। अतीत में दिखे संघर्षों के बावजूद, अब दोनों दल यह समझते हैं कि सिर्फ़ ट्रिक-टैको पर टिके रहकर नहीं जीत सकते; बल्कि एक मजबूत और तालमेलपूर्ण गठबंधन योजना बनानी पड़ेगी ताकि विपक्षी दलों के बीच समन्वय हो सके और मतदाताओं के बीच मतभेद को दूर किया जा सके। इसके अलावा, पंजाब विधानसभा चुनाव के बावजूद भी चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव पूर्व होना अनिवार्य है और इस बार भी दोनों दलों के बीच एकजुट होकर कार्य करने की संभावना तेज़ी से बढ़ रही है। कांग्रेस के अंदर भी यह सर्वसम्मति स्पष्ट हो रही है कि 2024 के लोकसभा तथा 2025 के नगर निगम चुनाव में भी दो प्रमुख दलों के बीच एक फ्यूजन की आकांक्षा है। यह मतदाताओं के बीच उम्मीद जगाती है कि दोगली चुनाव लड़ने की बजाए एक सशक्त, संयुक्त मोर्चा प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रकार, चंडीगढ़ में आगामी नगर निगम चुनाव के परिदृश्य में दोनों दलों के बीच गठबंधन संभवतः आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण खबर बनकर सामने आ सकता है।

कांग्रेस को मिले थे 29 प्रतिशत वोट
साल 2021 के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को आप और भाजपा के मुकाबले कम सीटें मिली थी ।लेकिन सबसे ज्यादा वोट हासिल करने वाली पार्टी कांग्रेस बनी है। निगम चुनाव में कांग्रेस को 29.79 फीसद वोट पड़े हैं।

दूसरे नंबर पर भाजपा को 29.30 फीसद और तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी को 27.08 फीसद वोट पड़े हैं। निर्दलीय उम्मीदवार को 7.10 फीसद और अन्य को 6.26 फीसद वोट पड़ी हैं।मालूम हाे कि पंजाब में दोनो दल के नेता एक दूसरे का खुलकर विरोध करते हैं ।

 

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