तीरंदाजी में भारत का धमाल, चिकिता-साहिल ने जीता गोल्ड

आईची-नागोया Asian Games 2026 के तीरंदाजी इवेंट में एक और गोल्ड भारत को मिल चुका है। 30 सितंबर की सुबह वुमेंस टीम ने गोल्ड पर निशाना लगाया था, जबकि मिक्स्ड टीम इवेंट में भी भारत को गोल्ड मेडल मिला है। वुमेंस टीम में दमदार खेल दिखाने वाली चिकिता तनिपार्थी ने मिक्स्ड टीम में हिस्सा लिया,…

तीरंदाजी में भारत का धमाल, चिकिता-साहिल ने जीता गोल्ड

आईची-नागोया

Asian Games 2026 के तीरंदाजी इवेंट में एक और गोल्ड भारत को मिल चुका है। 30 सितंबर की सुबह वुमेंस टीम ने गोल्ड पर निशाना लगाया था, जबकि मिक्स्ड टीम इवेंट में भी भारत को गोल्ड मेडल मिला है। वुमेंस टीम में दमदार खेल दिखाने वाली चिकिता तनिपार्थी ने मिक्स्ड टीम में हिस्सा लिया, जहां उनका साथ साहिल राजेश जाधव ने दिया। दोनों ने साथ मिलकर धमाल मचाया और देश को गोल्ड मेडल दिलाया। इस जोड़ी को ओलंपिक का टिकट भी मिल गया है। साउथ कोरिया के खिलाफ कांटे की टक्कर वाले शूट-ऑफ में चिकिता और साहिल ने जीत हासिल की और LA ओलंपिक्स के लिए भारत की जगह पक्की की।

भारतीय जोड़ी हाफवे तक 80-78 से आगे थी, लेकिन साउथ कोरिया ने वापसी करते हुए मुकाबला 157-157 से बराबर कर दिया। इसके बाद मुकाबला शूट-ऑफ में पहुंचा, जहां चिकिता और साहिल दोनों ने 10 पॉइंट हासिल किए, जबकि साउथ कोरिया का आखिरी तीर 9 पॉइंट पर लगा। इस तरह भारत को इस रोमांचक मुकाबले में जीत मिली। इस जीत का मतलब यह भी है कि भारत ने हांग्जो 2023 एशियन गेम्स में कंपाउंड मिक्स्ड टीम के तौर पर गोल्ड जीता था, जिसे अपने पास बरकरार रखा है।

चिकिता और साहिल का धमाल

चिकिता तनिपार्थी और साहिल जाधव ने एक मुश्किल कंपाउंड मिक्स्ड टीम सेमीफाइनल में थाईलैंड को 156-155 से हराया था और गोल्ड मेडल मैच में अपनी जगह पक्की की। भारत ने शुरुआती एंड के बाद बढ़त बनाई थी और फिर पूरे मैच में थोड़ी सी बढ़त बनाए रखी। चिकिथा और साहिल ने फाइनल रोटेशन में लगातार 10-10 पॉइंट का स्कोर करके अपना धैर्य बनाए रखा था और बाद में सिर्फ एक पॉइंट से उन्हें जीत मिली। बनाकर अपना धैर्य बनाए रखा और एक पॉइंट से जीत पक्की कर ली। यही काम इस जोड़ी ने फाइनल में भी किया और परफेक्ट 10 लगाकर खिताब जीता।

आपको बता दें, इससे पहले वुमेंस कमाउंड टीम इवेंट में भी भारत ने तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीता था। कंपाउंड टीम में ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप, चिकिता तनिपार्थी सुबह करीब 6 बजे साउथ कोरिया के खिलाफ सेमीफाइनल में उतरीं थीं। इसके कुछ ही देर बाद उन्होंने गोल्ड मेडल मैच खेला था। फाइनल में उनके सामने चीनी खिलाड़ियो की चुनौती थी, जिससे उन्होंने पार पाया और देश को इन खेलों का सातवां गोल्ड मेडल दिलाया था। विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी इस टीम ने की थी। 238-234 के अंतर से चीन को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।

मिसाल से कम नहीं चिकिता और साहिल की कहानी
रोमांचक शूट ऑफ में साउथ कोरिया कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीतने वाले साहिल जाधव और चिकिता परितार्थी की कहानी नए तीरंदाजों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है. दोनों ने गोल्ड मेडल के साथ-साथ भारत के लिए 2028 ओलंपिक कोटा भी हासिल कर लिया. 18 साल की चिकिता जहां तेलंगाना के किसान परिवार से आतीं हैं तो महाराष्ट्र के साहिल जाधव ने अपने पड़ोसी को देखकर धनुष-बाण उठाया था। 

हार्वेस्टर मशीन बेचकर हुई चिकिता की ट्रेनिंग
चिकिता तनिपार्थी के पिता ने अपनी बेटी के लिए धनुष खरीदने और ट्रेनिंग का खर्च उठाने के लिए परिवार की राइस हार्वेस्टर मशीन बेच दी थी और कर्ज भी लिया था. तेलंगाना के पेड्डापल्ली जिले के सुल्तानपुर गांव में रहने वाले 51 साल के किसान श्रीनिवास राव और उनकी पत्नी श्रीलता राव ने अपने संघर्षों को याद करते हुए बताया। 

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