हिसार
इतिहास की किताबों में दर्ज सभ्यता को समझने के लिए अब केवल लिखित विवरण पर निर्भर नहीं रहना होगा। राखीगढ़ी महोत्सव में पर्यटक उस अतीत से भी रूबरू होंगे, जिसे जमीन के नीचे दबी कब्रों, मानव कंकालों और उनके वैज्ञानिक अध्ययन ने सामने लाने में मदद की है।
पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने टीला नंबर सात पर मिले हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान की कहानी पर एक लघु फिल्म तैयार की है। संग्रहालय की डिजिटल गैलरी में दिखाई जाने वाली इस फिल्म में खोदाई से लेकर डीएनए अध्ययन तक की प्रक्रिया को सरल ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। पहल का उद्देश्य पुरातात्विक शोध को विशेषज्ञों और शोधपत्रों तक सीमित रखने के बजाय आम दर्शकों के लिए समझने योग्य बनाना है।
कब्रों में मिल चुके आभूषण संग्रहालय के पीछे स्थित टीला नंबर सात को हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान माना जाता है। यहां खोदाई के दौरान करीब 80 मानव कंकाल मिलने की जानकारी है।
इनके साथ मिट्टी के बर्तन और आभूषण भी मिले थे। पुरातत्वविदों के लिए ये वस्तुएं केवल प्राचीन सामग्री नहीं, बल्कि उस समय मृतकों को दफनाने की परंपराओं को समझने के साक्ष्य हैं। माना जाता है कि मृतकों के साथ खाने-पीने की वस्तुएं रखने के लिए बर्तन कब्रों में रखे जाते थे। फिल्म में इन्हीं साक्ष्यों और उनके अध्ययन से जुड़ी जानकारी को दर्शकों के सामने रखा जाएगा।
एक कंकाल के डीएनए पर हुआ
शोध राखीगढ़ी के एक मानव कंकाल से प्राप्त डीएनए पर हुए शोध ने हड़प्पाकालीन आबादी के आनुवंशिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई।
एक व्यक्ति के डीएनए के आधार पर पूरी हड़प्पाकालीन आबादी के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। टीला नंबर एक पर प्रदर्शनी के लिए एक कंकाल भी रखा गया है, जिसे पर्यटक देख सकेंगे। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक नरेंद्र परमार के अनुसार, महोत्सव में फिल्मों के माध्यम से पर्यटकों को राखीगढ़ी के इतिहास से परिचित कराया जाएगा
इतिहास, संस्कृति और खेल का आयोजन राखीगढ़ी महोत्सव 19 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। प्रदर्शनी, कार्यशाला, लघु फिल्म, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हेरिटेज वाक और प्रश्नोत्तरी इसके प्रमुख आकर्षण होंगे। 22 से 24 अक्टूबर तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञ लोगों के सवालों के जवाब देंगे। इसी दौरान दंगल होगा, 24 की रात रागिनी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
कब्रों में मिल चुके आभूषण
संग्रहालय के पीछे स्थित टीला नंबर सात को हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान माना जाता है। यहां खोदाई के दौरान करीब 80 मानव कंकाल मिलने की जानकारी है। इनके साथ मिट्टी के बर्तन और आभूषण भी मिले थे।
पुरातत्वविदों के लिए ये वस्तुएं केवल प्राचीन सामग्री नहीं, बल्कि उस समय मृतकों को दफनाने की परंपराओं को समझने के साक्ष्य हैं। माना जाता है कि मृतकों के साथ खाने-पीने की वस्तुएं रखने के लिए बर्तन कब्रों में रखे जाते थे। फिल्म में इन्हीं साक्ष्यों और उनके अध्ययन से जुड़ी जानकारी को दर्शकों के सामने रखा जाएगा।
एक कंकाल के डीएनए पर हुआ शोध
राखीगढ़ी के एक मानव कंकाल से प्राप्त डीएनए पर हुए शोध ने हड़प्पाकालीन आबादी के आनुवंशिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई।
एक व्यक्ति के डीएनए के आधार पर पूरी हड़प्पाकालीन आबादी के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। टीला नंबर एक पर प्रदर्शनी के लिए एक कंकाल भी रखा गया है, जिसे पर्यटक देख सकेंगे।
पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक नरेंद्र परमार के अनुसार, महोत्सव में फिल्मों के माध्यम से पर्यटकों को राखीगढ़ी के इतिहास से परिचित कराया जाएगा।
इतिहास, संस्कृति और खेल का आयोजन
राखीगढ़ी महोत्सव 19 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। प्रदर्शनी, कार्यशाला, लघु फिल्म, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हेरिटेज वाक और प्रश्नोत्तरी इसके प्रमुख आकर्षण होंगे। 22 से 24 अक्टूबर तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञ लोगों के सवालों के जवाब देंगे। इसी दौरान दंगल होगा, 24 की रात रागिनी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
















