वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 11 केवी विद्युत लाइन से जंगली सुअर का शिकार करने की कोशिश को किया नाकाम, एक आरोपी गिरफ्तार
वन्यप्राणियों के शिकार के लिए फैलाया जा रहा था करंट, वन विभाग की रात्रि गश्ती टीम ने एक आरोपी को पकड़ा, अन्य आरोपियों की तलाश जारी
भोपाल
वन्यप्राणियों के अवैध शिकार पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग द्वारा लगातार निगरानी एवं गश्ती की जा रही है। इसी क्रम में वनमण्डल दक्षिण शहडोल की रात्रि गश्ती टीम ने तत्परता दिखाते हुए विद्युत करंट से वन्यप्राणी का शिकार करने की कोशिश को नाकाम कर दिया। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे जिला जेल शहडोल भेज दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वन संरक्षक वन वृत्त शहडोल महेन्द्र प्रताप सिंह (भा.व.से.) के निर्देशन तथा वनमण्डलाधिकारी दक्षिण शहडोल सुश्रद्धा पन्द्रे (भा.व.से.) एवं उप वनमण्डलाधिकारी सोहागपुर संतोष कुमार शुक्ला के मार्गदर्शन में 30 एवं 31 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात वनमण्डल दक्षिण शहडोल के अंतर्गत गठित रात्रि गश्ती दल वन क्षेत्र में निगरानी कर रहा था।
इसी दौरान ग्राम धनगवां के भैरव टोला राजस्व क्षेत्र में भैरव टोला से कॉलोनी की ओर जाने वाली 11 केवी विद्युत लाइन से वन्यप्राणियों के शिकार के लिए करंट फैलाए जाने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही गश्ती दल ने तत्काल मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान घटनास्थल से कुछ व्यक्ति भागते हुए दिखाई दिए। गश्ती दल ने तत्परता दिखाते हुए एक व्यक्ति को पकड़ लिया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम कतकू पिता हरीदीन बैगा, निवासी धनगवां बताया। आरोपी ने 11 केवी विद्युत लाइन से करंट फैलाकर जंगली सुअर का शिकार करने का प्रयास किए जाने की बात स्वीकार की। वन विभाग की टीम ने समय रहते कार्रवाई करते हुए वन्यप्राणी के शिकार की योजना को विफल कर दिया।
गिरफ्तार आरोपी को दिनांक 1 नवंबर 2026 को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा मेडिकल परीक्षण के उपरांत आरोपी को जिला जेल शहडोल भेज दिया गया। वहीं मौके से फरार अन्य आरोपियों की तलाश वन विभाग द्वारा की जा रही है।
इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
उक्त कार्रवाई में वन परिक्षेत्राधिकारी गोहपारू हेमन्त प्रजापति एवं परिक्षेत्र सहायक चुहरी नरेन्द्र बाथम के नेतृत्व में बीटगार्ड धनगवां शिवम बैगा, वनरक्षक रीतेन्द्र श्रीवास्तव, हीरालाल पनिका, के.के. शुक्ला, लक्ष्मी सिंह धुर्वे, कु. लक्ष्मी सिंह धुर्वे, शैलेष तिवारी एवं अन्य वन अमले की सराहनीय भूमिका रही।
















