क्षेत्रीय तनाव के बीच ब्रह्मोस बना चर्चा का केंद्र, विरोधी खेमे में बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली भारत की एक कूटनीतिक चाल से इस्‍लामिक NATO के खलीफ तुर्की का दम घुटने लगना है. तुर्की ने जिस तरह से आतंकवादियों के पनाहगार पाकिस्‍तान का साथ दे रहा है, उससे भारत को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने और उसे बदलने पर मजबूर होना पड़ा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की एक्‍सपर्ट पाकिस्‍तान…

क्षेत्रीय तनाव के बीच ब्रह्मोस बना चर्चा का केंद्र, विरोधी खेमे में बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली

भारत की एक कूटनीतिक चाल से इस्‍लामिक NATO के खलीफ तुर्की का दम घुटने लगना है. तुर्की ने जिस तरह से आतंकवादियों के पनाहगार पाकिस्‍तान का साथ दे रहा है, उससे भारत को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने और उसे बदलने पर मजबूर होना पड़ा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की एक्‍सपर्ट पाकिस्‍तान में मौजूद थे. इससे भारत की चिंता और भी बढ़ गई. इसके बाद तुर्की को उसके ही आंगन में घेरने की कवायद शुरू कर दी गई. अब इसका असर दिखने लगा है. तुर्की की बौखलाहट बढ़ गई है. दरअसल, भारत ने भूमध्‍य सागर में अपनी डिफेंस डिप्‍लोमेसी को रफ्तार के साथ धार देना भी शुरू कर दिया है. अभी तो बस शुरुआत भर है, लेकिन उससे ही इस्‍लामिक NATO के इस खलीफा का दम निकलने लगा है. भारत तुर्की के तीन पड़ोसी देशों के साथ अपने रक्षा संबंधों को लगातार नई ऊंचाई दे रहा है. इन तीनों देशों ने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की खरीद में दिलचस्‍पी भी दिखाई है. ब्रह्मोस का नाम सुनकर ही तुर्की में घबराहट है. तुर्की की मीडिया में इस बात की ड‍िमांड भी बढ़ गई है कि इससे पहले कि ग्रीस की हाथों में ब्रह्मोस जैसी मिसाइल और मॉडर्न वेपन सिस्‍टम पहुंचे, उसपर अटैक कर देना चाहिए।

पिछले कुछ सालों में भारत ने भूमध्‍य सागर में तुर्की के तीन पड़ोसी देशों – अर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर काम करना शुरू किया है. खासकर रक्षा के क्षेत्र में तीनों देशों ने भारत के साथ संबंधों को नया आयाम देने की गंभीर कोशिश की है. तुर्की के मनमाने रवैये से परेशान अर्मेनिया के भारत के साथ मजबूत रक्षा संबंध हैं. अर्मेनिया को भारत से कई तरह के मॉडर्न वेपन सिस्‍टम भी मिले हैं. दूसरी तरफ, साइप्रस और ग्रीस भी भारत के साथ रक्षा संबंधों को बढ़ाने में जुटे हैं. कुछ दिनों पहले ही साइप्रस के प्रधानमंत्री निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स भारत के दौरे पर आए थे. इस दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को स्‍ट्रैटजिक पार्टनरशिप का दर्जा देने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही साइप्रस और भारत के बीच रक्षा संबंध आने वाले दिनों में और भी मजबूत होने की संभावना प्रबल हो गई है. भारत और ग्रीस के बीच भी स्‍ट्रैटजकि पार्टनरशिप को लेकर एग्रीमेंट हुआ है. एथेंस ने ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में अपनी दिलचस्‍पी दिखाई है।

तुर्की में बौखलाहट
इस्‍लामिक NATO के जरिये भारत की घेरेबंदी करने की साजिश कर रहा है तुर्की अब भारत की कूटनीति के सामने पस्‍त होता दिख रहा है. दरअसल, तुर्की की ग्रीस से पुरानी रंजिश रही है. अब जब यह खबर सामने आई कि ग्रीस भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी कर रहा है तो तुर्की की सांस उखड़ने लगी है. अंकारा में बौखलाहट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तुर्की की मीडिया में ग्रीस पर पहले ही अटैक करने की सलाह दी जाने लगी है. तुर्की के एक्‍सपर्ट और नीति-नर्माताओं को इस बात का डर है कि यदि ग्रीस के पास ब्रह्मोस मिसाइल आ गई तो रीजन में सिक्‍योरिटी कैलकुलेशन पूरी तरह से बदल जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की के साथ ही पूरी दुनिया ने देखा कि ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने किस तरह से पाकिस्‍तान के तमाम एयर डिफेंस सिस्‍टम को भेदते हुए तबाही ट्रेलर दिखाया था।

इस वजह से ब्रह्मोस बेहद खास

    दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल: ब्रह्मोस लगभग Mach 2.8 से 3 की रफ्तार से उड़ती है, यानी आवाज की गति से करीब तीन गुना तेज।

    भारत-रूस की संयुक्त परियोजना: इसे भारत के DRDO और रूस की NPO Mashinostroyenia ने मिलकर विकसित किया है।

    मल्टी-प्लेटफॉर्म लॉन्च क्षमता: ब्रह्मोस को जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है।

    ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक: लॉन्च के बाद इसे लगातार कंट्रोल करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे दुश्मन के लिए इसे रोकना मुश्किल हो जाता है।

    बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान: यह समुद्र की सतह से सिर्फ 5 से 10 मीटर ऊपर उड़ सकती है, जिससे रडार पर पकड़ना कठिन होता है।

    उच्च सटीकता के साथ हमला: ब्रह्मोस दुश्मन के ठिकानों और युद्धपोतों पर बेहद सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।
    दो चरण वाला इंजन सिस्टम: पहले चरण में सॉलिड बूस्टर और दूसरे चरण में लिक्विड रैमजेट इंजन इस्तेमाल होता है, जो इसे सुपरसोनिक गति देता है।

    भारी वारहेड ले जाने की क्षमता: यह करीब 200 से 300 किलोग्राम तक का पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है।

    दुश्मन के लिए इंटरसेप्ट करना मुश्किल: इसकी तेज गति, कम ऊंचाई वाली उड़ान और बदलते फ्लाइट पाथ इसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बनाते हैं।

    भारत का सफल रक्षा निर्यात हथियार: फिलीपींस ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला विदेशी देश बना और अब कई अन्य देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं।

अर्मेनिया और साइप्रस को भी मिलेगा ब्रह्मोस?
तुर्की के दो और पड़ोसी देश भारत के अहम साझीदार हैं – अर्मेनिया और साइप्रस. इन दोनों देशों ने भी नई दिल्‍ली के साथ अपने संबंधों को स्‍ट्रैटजिक लेवल पर अपग्रेड किया है. अर्मेनिया पहले से ही भारतीय हथ‍ियारों का बड़ा खरीदार बना हुआ है. वहीं, साइप्रस के प्रधानमंत्री निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स कुछ दिनों पहले ही भारत की यात्रा पर आए थे. इस दौरान दोनों देशों ने डिफेंस सेक्‍टर में साझीदारी को लेकर सहमति जताई है. ग्रीस और अर्मेनिया की तरह ही साइप्रस ने भी भारत से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल खरीदने की चाहत दिखाई है. उम्‍मीद है कि आने वाले दिनों, महीनों या कुछ वर्षों में ग्रीस, अर्मेनिया और साइप्रस के पास ब्रह्मोस मिसाइल होगी. इस तरह तुर्की तीन तरफ से यानी पूरब, पश्चिम और दक्षिण तीन दिशाओं से ब्रह्मोस मिसाइल की नोक पर होगा. और इसी बात से तुर्की में खलबली मची हुई है. तुर्की के एनालिस्‍ट और वहां की मीडिया पहले ही ग्रीस पर अटैक करने की बात करने लगे हैं।

 

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