वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ‘सीता नवमी’ या ‘जानकी नवमी’ के रूप में बड़े ही भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सीता का प्राकट्य धरती से हुआ था। माता सीता को त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सीता नवमी का दिन उन जातकों के लिए वरदान के समान है, जिनके विवाह में देरी हो रही है। ऐसे में आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
सीता नवमी और मां गौरी का संबंध
माता सीता ने खुद भगवान श्री राम को पति के रूप में पाने के लिए देवी गौरी की कठिन आराधना की थी। उन्होंने ‘गिरिजा पूजन’ कर माता गौरी से सुयोग्य वर का आशीर्वाद मांगा था। यही वजह है कि सीता नवमी के दिन अगर कुंवारी कन्याएं माता गौरी की पूजा करती हैं, तो उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।
करें ये खास उपाय
गौरी-सीता पूजन: सीता नवमी के दिन माता सीता और भगवान राम के साथ मां गौरी की प्रतिमा स्थापित करें। माता सीता को पीली चुनरी और मां गौरी को लाल चुनरी अर्पित करें। इससे कुंडली के दोष शांत होते हैं।
शृंगार सामग्री का दान: इस दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री दान करने से विवाह के योग जल्दी बनते हैं।
मनोकामना पूर्ति मंत्र: पूजा के दौरान तुलसीदास जी द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ के उस प्रसंग का पाठ करें, जिसमें सीता जी गौरी पूजन करती हैं।
प्रसंग
“मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।” इस चौपाई के जप से विवाह की अड़चनें स्वतः समाप्त होने लगती हैं।
पीले फूल चढ़ाएं: अगर विवाह तय होकर बार-बार टूट जाता है, तो सीता नवमी पर राम-सीता के चरणों में 108 पीले फूल अर्पित करें।
।।गौरी स्तुति।।
जय जय गिरिराज किसोरी।
जय महेस मुख चंद चकोरी॥
जय गजबदन षडानन माता।
जगत जननि दामिनी दुति गाता॥
देवी पूजि पद कमल तुम्हारे।
सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥
मोर मनोरथ जानहु नीकें।
बसहु सदा उर पुर सबही के॥
कीन्हेऊं प्रगट न कारन तेहिं।
अस कहि चरन गहे बैदेहीं॥
बिनय प्रेम बस भई भवानी।
खसी माल मुरति मुसुकानि॥
सादर सियं प्रसादु सर धरेऊ।
बोली गौरी हरषु हियं भरेऊ॥
सुनु सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥
नारद बचन सदा सूचि साचा।
सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हियं हरषीं अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥
।।गौरी स्त्रोत।।
ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके।
हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके।।
हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके।
शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके।।
मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले।
सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये।।
पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते।
पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्।।
मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले।
संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्।।
देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः।
प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे।।
तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्।
वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने-दिने।।
मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले।
सीता नवमी पर विवाह में देरी दूर करने के खास उपाय और पूजा विधि
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ‘सीता नवमी’ या ‘जानकी नवमी’ के रूप में बड़े ही भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सीता का प्राकट्य धरती से हुआ था। माता सीता को त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग…

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