नई दिल्ली
आवारा कुत्तों को लेकर दिए गए फैसले ने एक बार फिर देशभर में बहस छेड़ दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने नवंबर 2025 के उस आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया, जिसमें अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक संस्थानों और जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था. यानी कोर्ट ने आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में शिफ्ट करने को कहा है. लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत में इतने शेल्टर होम हैं, जहां सभी कुत्तों को शिफ्ट किया जा सके. अगर ऐसा नहीं है तो फिर यह आदेश जमीन पर कैसे लागू होगा? तो समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर हकीकत है क्या?
भारत में कितने आवारा कुत्ते हैं?
वैसे भारत में आधिकारिक रुप से सरकार की ओर से इसे लेकर कोई आंकड़ा शेयर नहीं किया गया है. लेकिन, कई सर्वे के आधार पर बताया जाता है कि भारत में करीब 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते हैं. यह आंकड़ा देश में स्ट्रे डॉग्स की वास्तविक स्थिति का सबसे व्यापक अनुमान माना जाता है. इसके अलावा, अगर कुल आवारा पशुओं की बात की जाए, तो संख्या करीब 2.04 करोड़ तक पहुंच जाती है, जिसमें गाय, बकरी और अन्य पशु भी शामिल हैं. हालांकि इनमें कुत्ते सबसे बड़ा हिस्सा बनाते हैं।
इंडिया डेटा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 20.6 लाख, ओडिशा में 17.3 लाख, महाराष्ट्र में 12.8 लाख, राजस्थान में 10 लाख, मध्य प्रदेश में 10 लाख, कर्नाटक में 10 लाख, पश्चिम बंगाल में 10 लाख और आंध्र प्रदेश में 8.6 लाख आवारा कुत्ते हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि देश के कई बड़े राज्यों में स्ट्रे डॉग्स की आबादी बहुत अधिक है।
कितने डॉग शेल्टर हैं?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतने कुत्तों के लिए पर्याप्त शेल्टर मौजूद हैं? भारत में लगभग 3,345 एनिमल शेल्टर होने का अनुमान है. लेकिन इनमें सिर्फ डॉग शेल्टर ही नहीं, बल्कि गौशालाएं और अन्य पशु आश्रय भी शामिल हैं. यानी वास्तविक डॉग शेल्टर की संख्या इससे काफी कम हो सकती है. बीएमसी ने बताया था कि मुंबई में 90,000 से ज्यादा स्ट्रे डॉग्स के लिए केवल 8 शेल्टर होम थे. दिल्ली में एमसीडी के पास लगभग 20 एनिमल कंट्रोल सेंटर हैं, जिन्हें पूरी तरह आधुनिक शेल्टर नहीं माना जाता।
क्या पॉसिबल हो पाएगा?
सुनवाई के दौरान यह तर्क रखा गया कि अगर सभी स्ट्रे डॉग्स को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक जगहों से हटाकर शेल्टर में रखा जाए, तो इसके लिए एक विशाल और महंगा सिस्टम बनाना पड़ेगा. इसके लिए कुत्तों की पहचान और पकड़, उन्हें शेल्टर तक पहुंचाना, नसबंदी और टीकाकरण, लंबे समय तक देखभाल, लगातार रिकॉर्ड और निगरानी का काम करना होगा. ऐसे में अगर एक कुत्ते पर औसतन 40 रुपये प्रतिदिन का भोजन खर्च माना जाए, तो केवल खाने का सालाना खर्च ही 22,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
कोर्ट में भी ये कहा गया था कि अगर भारत में 1.53 करोड़ आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए, और एक शेल्टर में औसतन 200 कुत्ते रखे जाएं, तो देश को 77,000 से ज्यादा शेल्टर की जरूरत पड़ेगी. अब नए शेल्ट होम बनाने के लिए हजारों एकड़ जमीन, लाखों कर्मचारियों की जरूरत और हजारों करोड़ रुपये का निवेश की जरुरत होगी।
कुत्ते के काटने के कितने केस?
साल 2024 में भारत में 37.17 लाख डॉग बाइट केस दर्ज किए गए थे. इसमें 54 संदिग्ध रेबीज़ मौतें रिपोर्ट हुईं. यह डेटा NCDC द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एकत्र किया गया है और संसद में प्रस्तुत किया गया।
आवारा कुत्तों पर SC के आदेश से बढ़े सवाल, क्या शहरों में पर्याप्त शेल्टर मौजूद हैं?
नई दिल्ली आवारा कुत्तों को लेकर दिए गए फैसले ने एक बार फिर देशभर में बहस छेड़ दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने नवंबर 2025 के उस आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया, जिसमें अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक संस्थानों और जगहों से आवारा कुत्तों को…

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