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खेतों में जानलेवा खतरा, 189 कीटनाशक सैंपल फेल, विधानसभा में पेश हुआ डेटा

जयपुर  दो साल में 535 किसानों की मौत, 5.1 करोड़ रुपये का मुआवजा और 189 घटिया कीटनाशक सैंपल… आंकड़े थोड़े चौकाने वाले हैं लेकिन राजस्थान में सवाल उठा रहे हैं। विधानसभा में पेश किए गए ये आंकड़े केमिकल-आधारित खेती के खतरनाक पहलू और सुरक्षा में कमी व नियमों के पालन पर सवाल उठा रहे हैं।…

खेतों में जानलेवा खतरा, 189 कीटनाशक सैंपल फेल, विधानसभा में पेश हुआ डेटा

जयपुर
 दो साल में 535 किसानों की मौत, 5.1 करोड़ रुपये का मुआवजा और 189 घटिया कीटनाशक सैंपल… आंकड़े थोड़े चौकाने वाले हैं लेकिन राजस्थान में सवाल उठा रहे हैं। विधानसभा में पेश किए गए ये आंकड़े केमिकल-आधारित खेती के खतरनाक पहलू और सुरक्षा में कमी व नियमों के पालन पर सवाल उठा रहे हैं।

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024 और जनवरी 2026 के बीच खेतों में काम करते समय कीटनाशकों के संपर्क में आने से किसानों की मौत हुई। बीकानेर में सबसे ज्यादा 57 मौतें हुईं, इसके बाद चुरू (56), हनुमानगढ़ (42) और झालावाड़ (42) का नंबर आता है। जोधपुर में 38 मौतें हुईं। श्रीगंगानगर और ब्यावर में 31-31 मौतें हुईं।

मुआवजे में भी सामने आई कमी
इस दौरान राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को मुआवजे के तौर पर 5.1 करोड़ रुपये दिए। हालांकि, अलग-अलग जिलों में मुआवजे की रकम में काफी अंतर था और इससे मौतों की रिपोर्ट और मंजूर किए गए दावों के बीच की कमियां सामने आईं। बीकानेर को मुआवजे के तौर पर 92 लाख रुपये, चुरू को 72 लाख रुपये, जोधपुर को 58 लाख रुपये और हनुमानगढ़ को 48 लाख रुपये मिले।

श्रीगंगानगर को 18 लाख रुपये मिले। झालावाड़ में 42 मौतें होने के बावजूद, वहां भी सिर्फ 18 लाख रुपये ही मिले। डीग में आठ मौतें हुईं लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला, जबकि कोटा में 11 मौतें हुईं और 2 लाख रुपये मिले। अधिकारियों ने इस अंतर की वजह दावों की जांच और मंजूरी की प्रक्रियाओं को बताया।

नहीं बताई हर मौत की सटीक वजह
कृषि विभाग के रिकॉर्ड में हर मौत की सटीक वजह नहीं बताई गई थी। इस डेटा में कीटनाशकों के इस्तेमाल से जुड़े खेती के कामों के दौरान हुई मौतें शामिल थीं और इसमें सिर्फ वही मामले थे जिनकी रिपोर्ट अधिकारियों ने दी थी और जिनकी पुष्टि की थी।

किशनपोल के विधायक अमीन कागजी ने कहा, "अगर रोजमर्रा के खेती के कामों के दौरान सैकड़ों किसान मर रहे हैं तो सरकार सिर्फ मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। हमें जवाबदेही, कीटनाशकों के लिए सख्त नियम और पूरे राजस्थान में किसानों के लिए एक व्यापक सुरक्षा कार्यक्रम की जरूरत है।"

कीटनाशक के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल
मौतों के इन आंकड़ों के साथ विधानसभा से एक और चिंताजनक जानकारी सामने आई। उसी दो साल की अवधि में 189 कीटनाशक के नमूने क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए। पूरे राजस्थान से इकट्ठा किए गए 5,570 कीटनाशक के नमूनों में से 5,521 का विश्लेषण किया गया। जहां 5,332 नमूने तय मानकों पर खरे उतरे, वहीं 189 घटिया क्वालिटी के पाए गए।

क्वालिटी की जांच के बाद अधिकारियों ने 282 नोटिस जारी किए, 14 कोर्ट केस दर्ज किए, 14 लाइसेंस सस्पेंड किए और 22 लाइसेंस रद कर दिए। घटिया क्वालिटी वाले कीटनाशक नमूनों की सूची में श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ सबसे ऊपर रहे, जहां हर जगह 17-17 नमूने खराब पाए गए। इसके बाद बीकानेर (13), कोटा (10) और भीलवाड़ा (9) का नंबर आता है।

श्रीगंगानगर में सबसे ज्यादा 34 नोटिस भी जारी किए गए, जिसके बाद बीकानेर (20), हनुमानगढ़ (19) और चूरू (17) का स्थान रहा। 14 मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई, जिनमें बीकानेर में पांच और श्रीगंगानगर में तीन मामले शामिल थे।

कीटनाशक को लेकर खड़े होते सवाल
ये आंकड़े भारत में कीटनाशकों से जुड़े खतरों की एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। ज्यादा पैदावार वाली खेती में लंबे समय से केमिकल वाले कीटनाशकों पर बहुत ज्यादा निर्भरता रही है, लेकिन जानकारों ने बार-बार चेतावनी दी है कि सुरक्षा के अपर्याप्त साधनों, असुरक्षित तरीके से इस्तेमाल, जरूरत से ज्यादा छिड़काव और खराब क्वालिटी के एग्रोकेमिकल्स की वजह से खेत जहरीली जगहों में बदल सकते हैं।

इंसानी सेहत को होने वाले खतरों के अलावा, कीटनाशकों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल का संबंध मिट्टी की क्वालिटी खराब होने, पानी के दूषित होने, जैव-विविधता के नुकसान और परागण करने वाले व फायदेमंद कीड़ों की आबादी घटने से भी जोड़ा गया है। इससे केमिकल पर बहुत ज्यादा निर्भर खेती के टिकाऊपन को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

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