West Bengal Politics: सुवेंदु अधिकारी के नए कानून पर सियासी घमासान, अपराधियों पर सख्त कार्रवाई का दावा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार का दिन एक बड़े धमाके की तरह होगा. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी राज्य के 54 साल पुराने कानून में बदलाव करने जा रही है. एक ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र’ लाने जा रहे हैं, जो अपराधियों की रीढ़ तोड़ देगा. इस नए कानून को उत्तर प्रदेश के ‘बुलडोजर मॉडल’ से भी कई…

West Bengal Politics: सुवेंदु अधिकारी के नए कानून पर सियासी घमासान, अपराधियों पर सख्त कार्रवाई का दावा

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार का दिन एक बड़े धमाके की तरह होगा. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी राज्य के 54 साल पुराने कानून में बदलाव करने जा रही है. एक ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र’ लाने जा रहे हैं, जो अपराधियों की रीढ़ तोड़ देगा. इस नए कानून को उत्तर प्रदेश के ‘बुलडोजर मॉडल’ से भी कई गुना अधिक घातक और सख्त माना जा रहा है. इसे लेकर पूरे बंगाल के गुंडा-बवालियों में अभी से मौत का खौफ है. जानते हैं पूरी कहानी। 

54 साल पुराने कानूनों की विदाई
बंगाल राज्य सरकार1972 में बने कानून The West Bengal Maintenance of Public Order Act, 1972 उसमें संशोधन करने जा रही है.  इसे 1972 में पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा पारित किया गया था और उसी वर्ष राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू हुआ था। 

इस कानून का संक्षिप्त इतिहास
1960 और 70 का दशक के दौर में पश्चिम बंगाल में राजनीतिक अस्थिरता, हिंसक आंदोलन और कानून-व्यवस्था की भारी समस्याएं थीं. सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) को बनाए रखने, उग्रवादी गतिविधियों को रोकने और अवैध हथियारों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार को विशेष शक्तियों की जरूरत थी, जिसके लिए यह कानून 1972 में लाया गया था। 

 ‘पश्चिम बंगाल में नया कानून?
लेकिन अब बंगाल सरकार ‘पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026’ को विधानसभा में पेश करने जा रही है. उसने दशकों पुराने ढर्रे को बदल दिया है. 1972 के कानून अब आधुनिक संगठित अपराध और दंगाई मानसिकता से लड़ने के लिए नाकाफी साबित हो रहे थे. सुवेंदु अधिकारी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बंगाल में ‘कानून का राज’ होगा, न कि ‘सिंडिकेट का राज’. 54 सालों से चली आ रही ढील अब हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। 

7 पीढ़ियों तक होगी वसूली, कोई नहीं बचेगा!
इस कानून का सबसे खौफनाक पहलू इसका ‘रिकवरी मैकेनिज्म’ है. यदि कोई दंगाई सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उसकी भरपाई सिर्फ अपराधी से नहीं, बल्कि उसकी संपत्ति से होगी. कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इसके प्रावधान इतने कड़े हैं कि एक बार दंगा करने पर अपराधी की आने वाली सात पीढ़ियां हर्जाना भरते-भरते कंगाल हो जाएंगी. यह केवल दंड नहीं, बल्कि ‘आर्थिक खात्मा’ है, जो दंगाइयों को कानून हाथ में लेने से पहले सोचने पर मजबूर कर देगा। 

बुलडोजर मॉडल का भी ‘बाप’ है ये बिल
उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ के मॉडल ने देशभर में दंगाइयों के बीच खौफ पैदा किया था, लेकिन सुवेंदु अधिकारी का यह नया बिल उससे भी दो कदम आगे है. इसमें ‘प्रिवेंटिव डिटेंशन’ (बिना मुकदमे हिरासत) और ‘एक्सटर्नमेंट’ (जिले से निष्कासन) जैसी शक्तियां पुलिस को असीमित अधिकार देती हैं. यह बिल दंगाइयों को पनाह देने वालों के खिलाफ भी ‘जीरो टॉलरेंस’ रखता है. किसी को पनाह देना भी अब दो साल की सीधी जेल का निमंत्रण होगा। 

विपक्ष की रूह क्यों कांप रही है?
जैसे ही इस बिल का ड्राफ्ट सामने आया, विपक्ष के गलियारों में सन्नाटा पसर गया है. जिन नेताओं को लगता था कि वे दंगों के जरिए अपनी राजनीति चमका लेंगे, उनकी रूह अब कांप रही है. वे जानते हैं कि यह कानून न केवल गुंडों को खत्म करेगा, बल्कि उन बड़े चेहरों को भी बेनकाब करेगा जो दंगों को स्पॉन्सर करते हैं. सुवेंदु अधिकारी सरकार ने साफ कर दिया है कि दंगा करना है, तो कीमत चुकाने के लिए तैयार रहो। 

शांति और सुरक्षा का नया युग
यह बिल बंगाल की बदलती तस्वीर का गवाह है. सरकार का कहना है कि यह कानून शरीफ नागरिकों की रक्षा के लिए एक ढाल है. जो बंगाल कल तक अराजकता की आग में जलता था. वह अब अपराधियों के लिए एक बड़ी जेल साबित होगा. सोमवार को जब यह कानून विधानसभा में बहस के लिए आएगा तो देखना यह होगा कि असल में क्या हुआ। 

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