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अमरनाथ धाम में हरियाणा के साहिल की अनोखी सेवा, थके श्रद्धालुओं के पैर दबाकर जीता दिल

श्रीनगर. श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा के लिए पहलगाम और बालटाल से लेकर पवित्र गुफा तक कुल 122 लंगर संगठनों की सेवा लगी है। इनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के संगठन शामिल हैं। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आ रहे लोगों की सेवा में इस…

अमरनाथ धाम में हरियाणा के साहिल की अनोखी सेवा, थके श्रद्धालुओं के पैर दबाकर जीता दिल

श्रीनगर.

श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा के लिए पहलगाम और बालटाल से लेकर पवित्र गुफा तक कुल 122 लंगर संगठनों की सेवा लगी है। इनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के संगठन शामिल हैं।

बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आ रहे लोगों की सेवा में इस संगठन से जुड़े लोग दिन-रात जुटे हैं। इसी कड़ी में करनाल के 17 साल के साहिल भी शामिल है। इस चाह में कि न जाने कब भगवान शिव के पांव दबाने का मौका मिल जाए। इसलिए सहिल न केवल लंगर की सेवा में जुटा है, बल्कि वह धाम पर दिन-रात श्रद्धालुओं को जल-पान कराने और उनकी सेवा करने में जुटा रहता है। चढ़ाई में जब श्रद्धालु थक जाते हैं तो भागकर गिलास में नींबू पानी बनाकर ले आता है। जब श्रद्धालु रात को थककर सो जाते हैं तो उनके पांव भी दबा देता है। साहिल ने कहा कि न जाने कब शिवभक्तों के पांव दबाते-दबाते भगवान शिव के पांव दबाने का मौका मिल जाए। यही कारण है कि वह इस अवसर को गंवाने नहीं चाहता।

श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे लोग
न केवल साहिल बल्कि ग्वालियर से आए दंपती श्रीअमरनाथ यात्रा के आधार शिविर मणिगाम में लंगर स्थल पर दो माह तक सेवा देने आए हैं। गांव में दिहाड़ी-मजदूरी कर गुजारा करने वाले शामलाल ने बताया कि उन्होंने सालभर मेहनत कर थोड़ा-थोड़ा कर पैसे जोड़े और 10 हजार रुपये जमा कर भंडारे के लिए दे दिए। शामलाल और उनकी पत्नी अनारकली जैसे सेवादार श्रीअमरनाथ यात्रा के मुख्य आधार हैं। यह सेवादार भंडारों में भोजन के प्रबंध के साथ श्रद्धालुओं का नियमित हौसला बढ़ा रहे हैं। बालटाल से करीब 50 किलोमीटर पहले गांदरबल जिले के मणिगाम में श्रीअमरनाथ यात्रा का शिविर बनाया गया है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु ठहरते हैं।

शाम लाल दिनभर लंगर स्थल पर खुशी-खुशी श्रद्धालुओं के यहां-वहां पड़े जूठे बर्तन उठाकर पंडाल के पीछे अपनी पत्नी को साफ करने के लिए देते हैं। स्वभाव से शांत 50 वर्षीय शामलाल ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष की ठान लिया था कि लंगर सेवा के लिए जाएंगे। इसी तरह कुछ सेवादार थके-मांदे श्रद्धालुओं का हौसला बढ़ाते हैं और उनको यात्रा के लिए प्रोत्साहित भी करते हैं। श्रद्धा और आस्था का भाव लिए इनकी सेवा से श्रद्धालुओं को राह भी दिखाते हैं। उनका समर्पण और सेवा का भाव श्रद्धालुओं को नई ऊर्जा देकर जाता है। यह संगठन दिन रात श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हुए है।

बुजुर्गों से लेकर बच्चे सब अपनी पूरी श्रद्धा भाव से श्रद्धालुओं की सेवा कर रहे हैं। इतनी उचाई पर ये लंगर सेवा श्रद्धालुओं के लिए एक लाइफ लाइन की तरह है। इन सब के बीच बरारीमार्ग में 14,500 फीट की ऊंचाई पर लगाए गए करनाल के एक लंगर में, हरियाणा का 17 वर्षिय साहिल दिन रात श्रद्धालुओं की सेवा कर रहा है।

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