,

भोजशाला विवाद: धार प्रशासन ने नमाज की तैयारी के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर किया मंथन

धार. ऐतिहासिक भोजशाला के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया आदेश जिला प्रशासन को प्राप्त हो गया है। इसके बाद प्रशासन आदेश के पालन को लेकर सक्रिय हो गया है। आदेश के अनुसार मुस्लिम पक्ष को नमाज करवाने के लिए खुला स्थान देने को लेकर प्रशासनिक अधिकारी हाईलेवल मीटिंग कर सभी संभावित विकल्पों…

भोजशाला विवाद: धार प्रशासन ने नमाज की तैयारी के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर किया मंथन

धार.

ऐतिहासिक भोजशाला के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया आदेश जिला प्रशासन को प्राप्त हो गया है। इसके बाद प्रशासन आदेश के पालन को लेकर सक्रिय हो गया है। आदेश के अनुसार मुस्लिम पक्ष को नमाज करवाने के लिए खुला स्थान देने को लेकर प्रशासनिक अधिकारी हाईलेवल मीटिंग कर सभी संभावित विकल्पों को खंगाल रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के आदेश के बाद से भोजशाला में नमाज पर रोक लगा दी गई थी। इसके पूर्व हर शुक्रवार को मुस्लिम समाज दोपहर 1 से 3 बजे तक यहां नमाज अदा करता था। सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर से सटे अथवा उसके निकट स्थित स्थान पर नमाज के लिए जगह उपलब्ध कराने की बात कही है। वहीं हिंदू पक्ष ने भोजशाला के समीप 300 मीटर तक नमाज अदा करने को लेकर आपत्ति जताई है। ऐसे में प्रशासन के लिए नमाज अदा करवाना बड़ी चुनौती बन गया है। अब सबकी निगाहें प्रशासन के निर्णय पर टिकी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14 जुलाई को दिया गया आदेश जिला प्रशासन को प्राप्त हो गया है, जिसके बाद जिला प्रशासन की हाईलेवल मीटिंग शुरू हो गई है। बैठक में कलेक्टर राजीव रंजन मीना, एसपी सचिन शर्मा, एएसपी विजय डावर, एसडीएम, तहसीलदार दिनेश उइके सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद अब प्रशासन का पूरा ध्यान उसके क्रियान्वयन पर है। आदेश में नमाज के लिए 'सेपरेट ओपन स्पेस' यानी अलग खुले स्थान की व्यवस्था करने और उसे 'अजेसेंट टू आर नियर द सब्जेक्ट प्रिमाइसेस' अर्थात भोजशाला परिसर से सटे अथवा उसके निकट स्थित स्थान पर उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 'नियर' यानी निकट की सीमा कितनी होगी। यही कारण है कि अब प्रशासन के सामने इन शब्दों की कानूनी और व्यावहारिक व्याख्या सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार आदेश में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द का अलग कानूनी महत्व है। 'अजेसेंट' का अर्थ परिसर से सटा हुआ स्थान माना जाता है, जबकि 'नियर' अपेक्षाकृत अधिक दूरी तक की संभावना छोड़ता है। इसी तरह 'एड हाक' का अर्थ अस्थायी अंतरिम व्यवस्था है, जबकि अदालत ने दोनों पक्षों के 'इनग्रेस एंड ईग्रेस' यानी आवागमन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने देने की भी शर्त रखी है। इसके अलावा आदेश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना किसी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में अब प्रशासन की पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट के आदेश की शब्द-दर-शब्द व्याख्या पर आधारित रहेगी।

पांच अगस्त को होगी अंतिम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला मामले की अपीलों को पांच अगस्त को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उसी दिन अंतिम फैसला आ जाएगा। अदालत सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख सकती है या आगे की तारीख भी तय कर सकती है। फैसले के बाद 17 जुलाई का पहला शुक्रवार आज है। अब पांच अगस्त की सुनवाई से पहले 24 और 31 जुलाई को दो शुक्रवार आएंगे। ऐसे में इन दोनों दिनों की नमाज की अंतरिम व्यवस्था और प्रशासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports