EPFO की नई योजना से विवादों का होगा समाधान, 6 महीने तक मौका

नई दिल्ली  अगर आपने ईपीएफओ से जुड़े कोई क्लेम कर रखा है और वह अभी तक पेंडिंग है, तो अब वो सभी पुराने पेंडिंग क्लेम सुलझने वाले हैं। दरअसल, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पेंडिंग विवादों के निपटा के लिए शुक्रवार 17 जुलाई को 'विश्वास 2026' (EPFO VISHWAS 2026) लॉन्च किया है। यह विवादों को…

EPFO की नई योजना से विवादों का होगा समाधान, 6 महीने तक मौका

नई दिल्ली
 अगर आपने ईपीएफओ से जुड़े कोई क्लेम कर रखा है और वह अभी तक पेंडिंग है, तो अब वो सभी पुराने पेंडिंग क्लेम सुलझने वाले हैं। दरअसल, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पेंडिंग विवादों के निपटा के लिए शुक्रवार 17 जुलाई को 'विश्वास 2026' (EPFO VISHWAS 2026) लॉन्च किया है। यह विवादों को सुलझाने में मदद करने के लिए एक बार का विवाद समाधान प्रोग्राम है।

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने दी। मंत्रालय की ओर से एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि "VISHWAS, 2026 को स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने, कानूनी विवादों को कम करने और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए हर्जाने और जुर्माने से जुड़े लंबे समय से लंबित विवादों के त्वरित समाधान को सक्षम करने के लिए शुरू किया गया है। यह योजना नियोक्ताओं को एक पारदर्शी, पूरी तरह से डिजिटल और समय-सीमा वाली प्रक्रिया के माध्यम से पात्र मामलों को निपटाने का अवसर प्रदान करती है।

6 महीने के लिए खुली रहेगी यह स्कीम
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा कि यह स्कीम 29 जून, 2026 को लागू हुई और छह महीने तक खुली रहेगी। इसमें 'एम्प्लॉईज़ प्रोविडेंट फंड्स एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट, 1952' की धारा 14B के तहत हर्जाना लगाने और 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' की धारा 128 के तहत पेनल्टी से जुड़े विवाद शामिल हैं।

मंत्रालय के अनुसार, "VISHWAS, 2026 को कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए स्वेच्छा से नियमों का पालन करने को बढ़ावा देने, कानूनी विवादों को कम करने और जुर्माना/हर्जाने से जुड़े लंबे समय से लंबित विवादों के तेजी से समाधान को संभव बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।"

VISHWAS से किस चीज का होगा निपटारा?

  • ऐसे मामले जिनमें जुर्माना या हर्जाने के आदेशों को किसी न्यायिक मंच के सामने चुनौती दी गई है।
  • हर्जाने या जुर्माने के वे अंतिम आदेश जिनमें वसूली बाकी है या केवल आंशिक रूप से वसूली हुई है, जिसमें रिकवरी सर्टिफिकेट (RRC) वाले मामले भी शामिल हैं।
  • ऐसे मामले जिनमें नोटिस तो जारी किए गए हैं, लेकिन हर्जाने या जुर्माने के अंतिम आदेश अभी जारी नहीं किए गए हैं।
  • ऐसे मामले जिनमें जुर्माना या हर्जाने के लिए नोटिस अभी जारी किए जाने बाकी हैं

 

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