स्मार्टफोन पिंकी क्या है? ज्यादा फोन इस्तेमाल से उंगली पर पड़ सकता असर

नई दिल्ली आज स्मार्टफोन हमारे हाथ से शायद ही कभी दूर रहता हो. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम चैट करते हैं, वीडियो देखते हैं, गेम खेलते हैं और सोशल मीडिया स्क्रॉल करते रहते हैं. कई लोगों का स्क्रीन टाइम 10 घंटे से भी ज्यादा होता है. लगातार फोन यूज करने में…

स्मार्टफोन पिंकी क्या है? ज्यादा फोन इस्तेमाल से उंगली पर पड़ सकता असर

नई दिल्ली
आज स्मार्टफोन हमारे हाथ से शायद ही कभी दूर रहता हो. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम चैट करते हैं, वीडियो देखते हैं, गेम खेलते हैं और सोशल मीडिया स्क्रॉल करते रहते हैं. कई लोगों का स्क्रीन टाइम 10 घंटे से भी ज्यादा होता है. लगातार फोन यूज करने में कई दिक्कतें हैं, लेकिन पिंकी फिंगर नाम की चीज असली है और आप खुद भी नोटिस कर पाएंगे.

लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने को लेकर एक नई प्रॉब्लम सामने आई है. इसे Smartphone Pinky कहा जा रहा है. सोशल मीडिया पर कई लोग अपनी छोटी उंगली की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि लगातार फोन पकड़ने की वजह से उनकी छोटी उंगली में गड्ढा पड़ गया है या वह हल्की टेढ़ी हो गई है.

आप भी लगातार फोन यूज करते हैं तो राइट हैंड की छोटी उंगली चेक करें. मुमकिन है आपको यहां एक गढ्ढे जैसा महसूस होगा. अगर लेफ्ट हैंड से फोन यूज करते हैं तो लेफ्ट हैंड में चेक करें.

सवाल यह है कि क्या सच में स्मार्टफोन आपकी उंगली का आकार बदल सकता है या फिर यह सिर्फ इंटरनेट पर वायरल हुआ एक नया ट्रेंड है? इस सवाल पर अब हाथ और हड्डियों के विशेषज्ञों ने अपनी राय दी है. उनका कहना है कि इस बात को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे लेकर घबराने की भी जरूरत नहीं है.

असल में स्मार्टफोन पिंकी कोई मेडिकल बीमारी का नाम नहीं है. डॉक्टर इस नाम का इस्तेमाल नहीं करते. यह एक ऐसा शब्द है जो सोशल मीडिया पर पॉपुलर हुआ. इसका मतलब उस स्थिति से है, जब लोग लंबे समय तक फोन का वजन अपनी छोटी उंगली पर टिकाकर रखते हैं. इससे उंगली पर हल्का निशान, दबाव या कुछ लोगों में हल्का मोड़ दिखाई दे सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ज्यादातर बार लगातार पड़ने वाले दबाव का असर होता है, न कि कोई नई बीमारी.

आज के स्मार्टफोन पहले की तुलना में बड़े और भारी हो गए हैं. ज्यादातर लोग एक हाथ से फोन पकड़ते हैं और उसका निचला हिस्सा छोटी उंगली पर टिकाकर रखते हैं. फिर उसी हाथ के अंगूठे से स्क्रीन पर स्क्रॉल करते रहते हैं. अगर यही तरीका रोज कई घंटों तक अपनाया जाए तो छोटी उंगली, अंगूठे और कलाई पर लगातार दबाव पड़ता है. इसी वजह से कुछ लोगों को उंगली में दर्द, अकड़न या निशान महसूस होने लगता है.

हाथ के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंसान का हाथ घंटों तक पतले और भारी स्मार्टफोन को पकड़ने के लिए नहीं बना है. जब छोटी उंगली फोन का पूरा वजन संभालती है तो उस पर मौजूद छोटे जोड़, मांसपेशियां और सॉफ्ट टिशू लगातार दबाव में रहते हैं. समय के साथ इससे दर्द, नंबनेस, कमजोरी या उंगली में असहजता महसूस हो सकती है. हालांकि हर शख्स में ऐसा होना जरूरी नहीं है.

क्या इससे उंगली हमेशा के लिए टेढ़ी हो जाती है? इसका जवाब अभी पूरी तरह क्लियर नहीं है. इस सबजेक्ट पर हुई मेडिकल रिसर्च बहुत लिमिटेड है. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज्यादातर मामलों में जो निशान दिखाई देता है, वह दबाव की वजह से बना टेंप्ररी निशान हो सकता है और फोन पकड़ने का तरीका बदलने पर कम भी हो सकता है. अभी तक ऐसा कोई मजबूत साइंटिफिक एविडेंस नहीं मिला है जो यह साबित करे कि सिर्फ स्मार्टफोन पकड़ने से हर शख्स की उंगली हमेशा के लिए टेढ़ी हो जाती है.

हालांकि डॉक्टर यह जरूर मानते हैं कि जरूरत से ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने से हाथों में दूसरी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. लंबे समय तक एक ही स्थिति में फोन पकड़ने से अंगूठे में दर्द, कलाई पर दबाव, टेंडन में सूजन, नसों पर असर और पकड़ने की ताकत कम होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. यानी स्मार्टफोन पिंकी भले ही आधिकारिक बीमारी न हो, लेकिन जरूरत से ज्यादा फोन इस्तेमाल करना हाथों के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में हुई एक स्टडी में नियमित स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले करीब 60 प्रतिशत लोगों ने हाथ या छोटी उंगली में किसी न किसी तरह के दर्द की शिकायत की. विशेषज्ञों का कहना है कि यह इस बात का संकेत है कि लंबे समय तक फोन पकड़ने की आदत शरीर पर असर डाल सकती है, इसलिए सही तरीके से फोन इस्तेमाल करना जरूरी है.

अगर आपको छोटी उंगली में लगातार दर्द, सुन्नपन, झनझनाहट या पकड़ने में कमजोरी महसूस हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टर सलाह देते हैं कि फोन पकड़ने का तरीका बदलें, दोनों हाथों का इस्तेमाल करें, बीच-बीच में ब्रेक लें और जरूरत हो तो फोन स्टैंड या ग्रिप एक्सेसरी का इस्तेमाल करें. अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे तो ऑर्थोपेडिक या हैंड स्पेशलिस्ट से जांच करानी चाहिए.

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