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स्मृति ईरानी की BJP में नई भूमिका तय, UP विधानसभा चुनाव से पहले मिली अहम जिम्मेदारी

लखनऊ यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले स्मृति ईरानी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने फिर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद से उनकी नई भूमिका को लेकर लगाई जा रहीं अटकलों पर भी विराम लग गया है। स्मृति ईरानी के जरिए भाजपा ने एक तीर से कई निशाने…

स्मृति ईरानी की BJP में नई भूमिका तय, UP विधानसभा चुनाव से पहले मिली अहम जिम्मेदारी

लखनऊ
यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले स्मृति ईरानी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने फिर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद से उनकी नई भूमिका को लेकर लगाई जा रहीं अटकलों पर भी विराम लग गया है। स्मृति ईरानी के जरिए भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। जेन-जी, पीडीए सहित तमाम चुनौतियों के बीच भाजपा को आधी आबादी का सहारा है। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ सीरियल से घर-घर में जगह बनाने वाली स्मृति संसद में भी भाजपा की मुखर आवाज बनी रहीं। राहुल गांधी को उन्हीं के गढ़ अमेठी में हरा चुकीं स्मृति को कांग्रेस के खिलाफ भाजपा के बड़े ट्रंप कार्ड के रूप में देखा जा रहा है।

हालिया मानसून सत्र में विपक्ष ने संसद नहीं चलने दी। इस दौरान कांग्रेस से प्रियंका गांधी और सपा से डिंपल यादव खासी मुखर रहीं। पिछले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में भी प्रियंका व डिंपल अपने तेवर दिखा चुकी हैं। भाजपा ने मिशन-2027 में कांग्रेस और सपा के इन दोनों प्रमुख चेहरों की काट के रूप में स्मृति ईरानी को उतारा है। दरअसल सड़क से लेकर संसद तक भाजपा की ओर से आधी आबादी के बीच एक मजबूत आवाज की कमी नजर आ रही थी। यह कमी कभी सुषमा स्वराज और फिर स्मृति ईरानी काफी हद तक पूरी करती दिखती थीं।

सदन से बाहर मजबूती से रखेंगी पार्टी का पक्ष
उधर, कांग्रेस और खासतौर से राहुल गांधी को घेरने के लिए भी भाजपा स्मृति की प्रतिभा का प्रयोग करती रही है। स्मृति ईरानी भले ही यूपी की मूल निवासी न हों लेकिन 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें यूपी कोटे से ही राष्ट्रीय महामंत्री जैसी महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई है। वर्ष 2014 में यूपी की अमेठी सीट से राहुल गांधी के खिलाफ मजबूती से खम ठोंकने वाली स्मृति ईरानी को हारने के बाद भी केंद्रीय मंत्री बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने उन्हें राहुल के सामने आगे खड़ा रखने का संदेश दे दिया था।

2019 में गांधी परिवार की इस परंपरागत सीट से जीत हासिल कर स्मृति ने सबको चौंकाया था। हालांकि 2024 में चुनावी हार का सामना करना पड़ा। उसके बाद से वे नई भूमिका के इंतजार में थीं। आखिरकार दो साल बाद उनका यह इंतजार खत्म हुआ। अब वे सदन में न सही, मगर सड़क पर पार्टी का मजबूती से पक्ष रखती नजर आएंगी।

टेलीविजन अभिनेत्री से कद्दावर कैबिनेट मंत्री
23 मार्च 1976 को नई दिल्ली में जन्मीं स्मृति ईरानी राजनीति में आने से पहले प्रसिद्ध टेलीविजन अभिनेत्री के रूप में विख्यात थीं। एकता कपूर के धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहु थी’ में ‘तुलसी वीरानी’ के किरदार से उन्हें घर-घर में अपार लोकप्रियता मिली।उन्होंने वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।2004 में महाराष्ट्र युवा विंग की उपाध्यक्ष बनीं।

2010 से 2013 तक भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं। इसके अलावा वह पार्टी की राष्ट्रीय सचिव और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसी अहम भूमिकाओं में भी कार्य कर चुकी हैं। अब राष्ट्रीय महामंत्री बनी हैं। सबसे पहले गुजरात से राज्यसभा की सदस्य बनकर संसद में प्रवेश किया। 2014 में राहुल गांधी से हारने के बाद 2019 उन्हें हराकर लोकसभा में प्रवेश किया। इस दौरान नरेंद्र मोदी की सरकार में मानव संसाधन विभाग, टेक्सटाइल, महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री रहीं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का भी अतिरिक्त प्रभार उनके पास रहा।

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