,

पीडीए पूरी तरह ढकोसला, दलित महापुरुषों से चिढ़ते हैं अखिलेशः ओमप्रकाश राजभर

लखनऊ  समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए के नारे को लेकर उन पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने तीखा हमला बोला है। सुभासपा अध्यक्ष ने कहा कि अखिलेश यादव का पीडीए पूरी तरह से ढकोसला है। अखिलेश कभी पीडीए को पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक बताते…

पीडीए पूरी तरह ढकोसला, दलित महापुरुषों से चिढ़ते हैं अखिलेशः ओमप्रकाश राजभर

लखनऊ
 समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए के नारे को लेकर उन पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने तीखा हमला बोला है। सुभासपा अध्यक्ष ने कहा कि अखिलेश यादव का पीडीए पूरी तरह से ढकोसला है। अखिलेश कभी पीडीए को पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक बताते हैं। कभी पी से पंडित, डी से दलित और ए से अहीर कहते हैं। कभी ए से अल्पसंख्यक तो कभी आधी आबादी और कभी अगड़ा बता देते हैं।

‘अखिलेश दलितों से नफरत करते हैं, दलित महापुरुषों से बढ़ जाती है चिढ़’
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव दलितों से नफरत करते हैं और दलितों के जो महापुरुष हैं, उनकी प्रतिमा देख कर वह बहुत ज्यादा चिढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि 2012 में अखिलेश यादव सरकार बनाए और 2017 तक देखा जाए तो समाजवादी पार्टी के गुंडों ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की असंख्य मूर्तियां तोड़ डालीं। राजभर ने कहा कि डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा सबसे ज्यादा समाजवादी पार्टी की सरकार में तोड़ी गईं। चाहे जौनपुर का मामला हो, मऊ का हो, सीतापुर हो या आजमगढ़… ऐसे तमाम जिले हैं जहां बाबा साहब की प्रतिमा तोड़ी गईं।

‘आगरा का मामला कौन भूल सकता है? दलित ग्राम प्रधान को पीट-पीटकर मार डाला’
ओमप्रकाश राजभर ने आगरा के एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सपा सरकार में दलित ग्राम प्रधान को सपाइयों ने पीट-पीटकर मार डाला था। ग्राम प्रधान का कसूर यह था कि उन्होंने सपा को वोट नहीं दिया था। इसके लिए उनकी हत्या कर दी गई। राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के लोग आंबेडकर जी के संबंध में अगर आंकड़े उठाकर देखेंगे तो अखिलेश राज में दलितों के ऊपर अत्याचार कई गुना बढ़ा था। बाबा साहब की प्रतिमा तोड़ने का रिकॉर्ड भी समाजवादी पार्टी की सरकार में ही सबसे ज्यादा रहा।

‘सपा के वोटर ही दलित अत्याचार में सबसे आगे’
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि आज भी यूपी में दलित अत्याचार के मामले में यादव और मुस्लिम यानी सपा के वोटर ही सबसे आगे हैं। खुद अखिलेश यादव और उनका सैफई का कुनबा बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए क्या विचार रखता है, यह किसी से छिपा नहीं है। लखनऊ के गेस्ट हाउस कांड में सपाई गुंडे मायावती की हत्या करना चाहते थे। संयोग से वहां बीजेपी के नेता पहुंच गए। बीजेपी के लोग नहीं होते तो शायद मायावती की हत्या कर दी जाती। किसी तरह से उनकी जान बची थी।

‘अखिलेश राज में दलित बेटियों पर जितना जुर्म हुआ, वो कौन नहीं जानता’
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव दलित सम्मान की बात करते हैं, लेकिन उनके राज में दलित बेटियों के साथ जितना जुर्म हुआ वो कौन नहीं जानता है। उन्होंने कहा कि आज वक्त बदल गया है। योगी राज में दलित महापुरुषों को सम्मान मिल रहा है और दलित नायकों को नई पहचान मिल रही है। महापुरुषों के नाम पर बने पार्क में अगर प्रतिमा पुरानी हो गई है तो उसे बदलने, बाउंड्री कराने और सौंदर्यीकरण के अन्य काम के लिए सरकार ने अभी 500 करोड़ रुपये दिए हैं और सभी जगह काम चालू हो गया है।

‘नीला गमछा अखिलेश के लिए गले का फांस, लाल टोपी दिमाग पर’
ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के नीले गमछे पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव सोच रहे हैं कि बाबा साहब डॉ. आंबेडकर को आगे करके वोट ले लेंगे, लेकिन उनके गले का नीला गमछा ही उनके गले का फांस है। सिर पर लाल टोपी और गले में नीला गमछा 2 जून 1995 की घटना याद दिलाता है कि आपने मायावती के साथ गेस्ट हाउस कांड में सपा ने क्या किया था।

‘आरक्षण में प्रमोशन का आरक्षण खत्म किया, महापुरुषों के नाम के पार्क और जिले खत्म किए’
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव ने आरक्षण में प्रमोशन का आरक्षण खत्म किया। दलित महापुरुषों बाबा साहब सहित अन्य के नाम से बने पार्क और जिले खत्म करने का काम अखिलेश यादव ने किया। दलितों के उत्थान और विकास के लिए महापुरुषों के नाम से बनी योजनाओं को भी खत्म करने का काम अखिलेश यादव ने किया।

‘आज योगी सरकार में सभी महापुरुषों का सम्मान सुरक्षित’
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि आज सभी महापुरुषों का सम्मान योगी जी की सरकार में सुरक्षित है। कहीं कोई घटना नहीं हो पा रही है। महापुरुषों को लेकर आज की सरकार जो काम कर रही है, अगर ऐसी सोच सत्ता में रहते हुए अखिलेश जी के मन में पैदा हुई होती तो शायद कुछ कदम आगे बढ़ते। इसलिए जिस सोच को लेकर अखिलेश यादव चल रहे हैं, उस पर 2027 में एक बार फिर पानी फिर जाएगा।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports