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नेपाल की बारिश से बिहार में हाहाकार, कोसी-गंडक का जलस्तर बढ़ा; 22 गांवों का संपर्क टूटा

 पटना बिहार में बाढ़ से एक बार फिर हाहाकार है। दरअसल नेपाल में हो रही लगातार बारिश से कोसी और गंडक के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। शुक्रवार की रात आठ बजे वीरपुर बराज पर कोसी का जलस्राव 2,81,795 क्यूसेक था। शनिवार सुबह पांच बजे 3,13,595 क्यूसेक तक आ पहुंचा। हालांकि, शाम में…

नेपाल की बारिश से बिहार में हाहाकार, कोसी-गंडक का जलस्तर बढ़ा; 22 गांवों का संपर्क टूटा

 पटना
बिहार में बाढ़ से एक बार फिर हाहाकार है। दरअसल नेपाल में हो रही लगातार बारिश से कोसी और गंडक के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। शुक्रवार की रात आठ बजे वीरपुर बराज पर कोसी का जलस्राव 2,81,795 क्यूसेक था। शनिवार सुबह पांच बजे 3,13,595 क्यूसेक तक आ पहुंचा। हालांकि, शाम में यह घटकर तीन लाख 400 क्यूसेक पर आया। इस साल का यह अधिकतम जलस्तर है। गंडक नदी में वाल्मीकिनगर बराज से शुक्रवार की रात डेढ़ लाख क्यूसेक पानी पार कर रहा था। शनिवार की सुबह आठ बजे यहां से दो लाख 73 हजार क्यूसेक पानी गुजरा। शाम चार बजे दो लाख 98 हजार क्यूसेक से अधिक हो गया। नदियों में अचानक से पानी बढ़ने के कारण 17 जिले को अलर्ट कर दिया गया है। पश्चिम चंपारण के कई गांवों में नदी का पानी घुस आया है। सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी बह रहा है। मधुबनी और दरभंगा जिले में दियारा क्षेत्र में बाढ़ का प्रकोप बढ़ गया है।

22 गांवों का सड़क संपर्क टूटा
वाल्मीकिनगर में गंडक के पास स्थित रोहुआ टोला, चकदहवा, झंडू टोला समेत कई गांवों में पानी घुस गया है। रामनगर के दोन क्षेत्र की नौरंगिया दोन व बनकटवा करमहिया पंचायत के 22 गांवों का फिर से सड़क संपर्क टूट गया है। मधुबन प्रखंड की चिऊरही समेत निचले गांवों को खाली करने की अपील की गई है। पूर्वी चंपारण में गंडक व बूढ़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि हो रही है। लालबेगिया में सिकरहना के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। अहिरौलिया में बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में भी वृद्धि शुरू है। सीतामढ़ी में बागमती नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है।

मुख्य सचिव ने की समीक्षा, सभी तैयारी रखने का निर्देश
नदियों के जलस्तर में हो रही वृद्धि के मद्देनजर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक आयोजित की गई। इससे आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह के साथ अन्य अधिकारी जुड़े। मुख्य सचिव ने 17 जिलों सीतामढ़ी, प. चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सारण, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया और बेगूसराय में विशेष सतर्कता बरतने और निगरानी के निर्देश दिए। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को अलर्ट रहने को कहा। आपात स्थिति के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने टोल-फ्री नंबर 1070 जारी किया है।

सीमांचल को बाढ़ से बचाने की योजना अधर में
सीमांचल को बाढ़ से बचाने की योजना महानंदा नदी बाढ़ प्रबंधन योजना फेज-दो फिलहाल अधर में लटक गई है। बीते आठ वर्षों में एक फीसदी भी तटबंध का निर्माण नहीं होने के कारण जल संसाधन विभाग ने निर्माण एजेंसी से एकरारनामा समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब इस योजना का निर्माण नए सिरे से करने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत सबसे पहले जमीन अधिग्रहण होगा तभी निविदा जारी होगी। अगर योजना समय पूरी होती तो कटिहार, किशनगंज, अररिया व पूर्णिया को सीधा लाभ होता।

अधिकारियों के अनुसार महानंदा बाढ़ प्रबंधन योजना फेज-दो के तहत 198.37 किलोमीटर तटबंध का निर्माण करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए वर्ष 2018 में निविदा जारी हुई। हैदराबाद की चयनित एजेंसी बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को काम मिलने पर विभाग ने एकरारनामा किया। तटबंध का निर्माण 31 मार्च 2021 तक पूरा कर लेना था। लेकिन एकरारनामा के आठ साल बीत जाने पर भी अब तक इस योजना के लिए जमीन अधिग्रहण नहीं हो सका। तटबंध बनाने को 1940.45 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी।

आठ साल में इसमें से मात्र 62.37 एकड़ जमीन ही अधिग्रहित हो सका। इस कारण 198.37 किमी तटबंध की लंबाई के विरुद्ध मात्र 1.04 किमी तटबंध ही बन सका। जमीन अधिग्रहण नहीं होने के कारण एजेंसी विभाग से लगातार पत्राचार करती रही। भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने को विभागीय अधिकारी समय-समय पर परियोजना स्थल का जायजा लेते रहे। स्थल निरीक्षण में पाया गया कि वहां दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। सरकार तटबंध बनाना चाह रही है तो कुछ विपक्षी दल के नेता या स्थानीय जनप्रतिनिधि तटबंध निर्माण का विरोध कर रहे हैं।

अब इस पर हो रहा है मंथन
जल संसाधन विभाग में इस पर मंथन चल रहा है कि इस परियोजना का काम नए सिरे से शुरू किया जाए। इसके लिए सबसे पहले जमीन अधिग्रहण का काम पूरा किया जाएगा। 80 फीसदी जमीन अधिग्रहण के बाद ही निविदा जारी होगी ताकि चयनित एजेंसी तटबंध का निर्माण कर सके। हालांकि आठ वर्षों में जमीन अधिग्रहित नहीं कर सका जल संसाधन विभाग की यह योजना कितनी कारगर होगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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