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मध्यप्रदेश में सीवेज के पानी से होगी कमाई, 28 अक्टूबर को इंदौर अर्बन कॉन्क्लेव में जारी होगी नई पॉलिसी

भोपाल  भोपाल शहर में नगरीय विकास विभाग ने अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को निकायों की कमाई का जरिया बनाने की योजना बनाई है। इसमें घरों में उपयोग किए पानी का ट्रीटमेंट कर दोबारा प्रदेश में ग्राउंड वाटर और पेयजल के लिए सप्लाई किए जाने वाले पानी की बचत होगी और नगरीय निकायों की आय भी…

मध्यप्रदेश में सीवेज के पानी से होगी कमाई, 28 अक्टूबर को इंदौर अर्बन कॉन्क्लेव में जारी होगी नई पॉलिसी

भोपाल 
भोपाल शहर में नगरीय विकास विभाग ने अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को निकायों की कमाई का जरिया बनाने की योजना बनाई है। इसमें घरों में उपयोग किए पानी का ट्रीटमेंट कर दोबारा प्रदेश में ग्राउंड वाटर और पेयजल के लिए सप्लाई किए जाने वाले पानी की बचत होगी और नगरीय निकायों की आय भी बढ़ेगी। इसके लिए प्रदेश के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों से ट्रीट होकर निकले साफ पानी को उद्योगों, रेलवे, निर्माण कार्यों के लिए दिया जाएगा। इसे नगरीय निकाय तय राशि लेकर सप्लाई करेंगे। यदि किसी को पेयजल जैसा शुद्ध पानी चाहिए तो इसके लिए टर्शियरी एसटीपी भी पीपीपी के तहत निजी निवेशकों के माध्यम से बनवाए जाएंगे।

विभाग ने इसके लिए यूज्ड वाटर पॉलिसी बना ली है। इसे 28 को इंदौर में होने जा रही अर्बन कॉन्क्लेव में सीएम डॉ मोहन यादव जारी करेंगे। इसका उद्देश्य पेयजल के लिए सप्लाई होने वाले पानी की बचत करना है। क्योंकि अभी हर काम के लिए या तो ग्राउंड वाटर उपयोग किया जाता है या नगरीय निकायों द्वारा सप्लाई किया गया पेयजल का उपयोग किया जा रहा है। इससे कई बड़े शहरों को गर्मियों में पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। खासतौर पर मालवा क्षेत्र में उद्योग बढ़ते जा रहे हैं लेकिन जलस्रोत सिमटते जा रहे हैं।

ऐसे होगा यूज्ड वाटर का मॉनेटाइजेशन
अधिकारियों के अनुसार मप्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनसे ट्रीटेड पानी अभी मुख्यतः गार्डनिंग में ही उपयोग किया जा रहा है। अब पहले चरण में एसटीपी के पास में ऐसे उद्यमों को चिह्नित किया जाएगा, जिन्हें पेयजल के अलावा अन्य उपयोग के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है। खासतौर से उद्योगों में धुलाई, कूलिंग आदि के लिए, रेलवे में कोच और प्लेटफॉर्म की धुलाई के लिए, निर्माण कार्यों, मार्गों की धुलाई, गार्डनिंग, सोसायटियों में फ्लश में उपयोग के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है। ऐसे में उन्हें एसटीपी से पानी सप्लाई की व्यवस्था की जाएगी। इसमें निवेशकों की भी मदद ली जाएगी। 

अगले चरण में घरों में फ्लश, गाड़ियों की धुलाई, गार्डनिंग आदि के लिए अलग से इसकी सस्ती दरों पर सप्लाई की व्यवस्था की जाएगी। साथ पीपीपी मोड पर टर्शियरी एसटीपी बनाए जाएंगे। इसके निवेशकों को सरकार जमीन आवंटन और निवेश में छूट और इंसेंटिव देगी। इससे पेयजल श्रेणी का पानी निकलता है। हालांकि फूड इंडस्ट्री और फार्मा इंडस्ट्री को यह पानी नहीं दिया जाएगा।

प्रदेश में उपयोग किए गए पानी को दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने के लिए यूज्ड वाटर पॉलिसी बनाई है। इसमें निजी निवेशकों की मदद से एसटीपी से निकले पानी को जरूरतमंद उद्यमों को बेचा जाएगा। इससे भूजल और पेयजल वाले पानी की बचत होगी और निकायों की आय बढ़ेगी। – संजय दुबे, एसीएस नगरीय विकास एवं आवास

सागर में सफल प्रयोग, निकाय की आय बढ़ी
सागर में यह प्रयोग शुरू हो चुका है। और सफल रहा है। इसके बाद ही विभाग ने सभी नगरीय निकायों के लिए यह पॉलिसी तैयार की है। सागर में उद्योगों और रेलवे को एसटीपी से पानी सप्लाई किया जा रहा है। इससे निकाय की आय बढ़ी है। कुछ और निकाय भी इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

रोज निकल रहा 1639 एमएलडी ट्रीटेड पानी
अभी मध्यप्रदेश में प्रतिदिन 2666 मिलियन लीटर प्रतिदिन सीवेज निकलता है। प्रदेश में लगाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों से प्रतिदिन 1639 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। जबकि यूटिलाइजेशन क्षमता प्रतिदिन 1117 एमएलडी ही है। ऐसा इसलिए क्योंकि अभी नालों को डायवर्ट कर एसटीपी से नहीं जोड़ा जा सका है। इसके जुड़ने और सीवेज लाइन बिछ जाने के बाद एसटीपी से मिलने वाले पानी की मात्रा काफी बढ़ जाएगी। नगरीय विकास विभाग इसके लिए अमृत-2.0. स्वच्छ भारत मिशन और अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के माध्यम से प्रयास कर रहा है।

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