,

पूर्णिया के मखाने की विदेशों में धूम, ग्रीस भेजी गई 1 टन की खेप; 8 जिलों में 37,440 टन उत्पादन

भागलपुर बिहार के सीमांचल की मिट्टी और पानी से उपजे 'सफेद मोती' यानी मखाने का डंका अब सात समंदर पार बज रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार के पूर्णिया के मखाने की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता और विदेशी बाजारों में इसके सीधे निर्यात का विशेष…

पूर्णिया के मखाने की विदेशों में धूम, ग्रीस भेजी गई 1 टन की खेप; 8 जिलों में 37,440 टन उत्पादन

भागलपुर
बिहार के सीमांचल की मिट्टी और पानी से उपजे 'सफेद मोती' यानी मखाने का डंका अब सात समंदर पार बज रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार के पूर्णिया के मखाने की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता और विदेशी बाजारों में इसके सीधे निर्यात का विशेष तौर पर उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री की इस सराहना के बाद अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजार में पूर्णिया और कोसी-सीमांचल के मखाने को नई ब्रांडिंग और व्यापक वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

गौरतलब है कि पिछले महीने आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए राष्ट्राध्यक्षों और राजनयिकों को पूर्णिया का विशेष 'अचारी फ्लेवर' वाला मखाना उपहार स्वरूप भेंट किया गया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तारीफ हुई थी।

मुंद्रा पोर्ट से ग्रीस के पिरियस बंदरगाह पहुंची व्यावसायिक खेप
अक्टूबर 2026 की शुरुआत में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा एपीडा (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूर्णिया से मखाने का संस्थागत विदेशी निर्यात अब नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। पूर्णिया के बेलौरी स्थित इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट द्वारा तैयार एक टन मखाने की पहली व्यावसायिक खेप सीधे यूरोपीय देश ग्रीस भेजी गई।

इस निर्यात की नोडल एजेंसी नई दिल्ली की एसएस फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड रही, जिसने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से कंटेनर के जरिए यह कंसाइनमेंट ग्रीस के प्रमुख पिरियस बंदरगाह तक पहुंचाया।

18 से अधिक देशों में धमक, 60 फीसदी उपज का निर्यात
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों के अलावा यूरोपीय संघ सहित 18 से अधिक देशों में सीमांचल के मखाने की सीधी आपूर्ति हो रही है। इनमें ग्रीस के अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई (दुबई), कतर, सिंगापुर, ब्राजील, मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल प्रमुख आयातक देश बन चुके हैं।

कोसी-सीमांचल मखाना: वैश्विक निर्यात एक नजर में

  • पीएम का संबोधन: ‘मन की बात’ कार्यक्रम।
  • ताजा व्यावसायिक निर्यात: 1 टन मखाना बेलौरी (पूर्णिया) से ग्रीस के पिरियस पोर्ट भेजा गया।
  • सप्लाई चेन: उत्पादक- इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट (पूर्णिया); निर्यातक- एसएस फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली); प्रस्थान- मुंद्रा बंदरगाह (गुजरात)।
  • वैश्विक मंच पर उपस्थिति: ब्रिक्स सम्मेलन में अतिथियों को भेंट किया गया था अचारी फ्लेवर मखाना।
  • निर्यात गंतव्य (18+ देश): ग्रीस, अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (दुबई), कतर, सिंगापुर, ब्राजील, मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि।
  • निर्यात हिस्सेदारी: कुल क्षेत्रीय उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत।
  • गुणवत्ता व खासियत: बड़े आकार का लावा, अत्यधिक कुरकुरा और शुद्ध दूधिया सफेद रंग।

कृषि व व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि कोसी और सीमांचल के जलजमाव वाले प्राकृतिक क्षेत्रों में उत्पादित मखाने की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसका बड़ा आकार और स्वाभाविक दूधिया सफेद रंग है। अपनी इसी उच्च गुणवत्ता और न्यूट्रिशन वैल्यू के कारण यहां उत्पादित कुल मखाने का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा वैश्विक बाजार में हाथों-हाथ खप रहा है।

वर्ष 2025-26: कोसी-सीमांचल के 8 जिलों में मखाना उत्पादन की स्थिति
जिला     खेती का क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)     लावा (पॉप्ड मखाना) उत्पादन (टन में)
कटिहार     7,527                                  8,950
पूर्णिया     7,204                                    8,565
सहरसा     4,046                                   4,810
सुपौल     3,814                                    4,534
अररिया     2,714                                   3,227
मधेपुरा     2,553                                    3,036
किशनगंज     2,470                                2,926
खगड़िया     1,170                                 1,392
कुल योग     31,498 हेक्टेयर                   37,440 टन

कोसी-सीमांचल के 8 जिलों में 37440 टन रिकॉर्ड उत्पादन
वाणिज्यिक और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कोसी-सीमांचल क्षेत्र के आठ जिलों में कुल 31,498 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मखाने की वैज्ञानिक खेती की गई, जिससे कुल 37,440 टन उन्नत मखाना लावा का उत्पादन दर्ज किया गया है।

उत्पादन के मामले में कटिहार जिला 7,527 हेक्टेयर में 8,950 टन उत्पादन के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि पूर्णिया जिला 7,204 हेक्टेयर में 8,565 टन उत्पादन के साथ दूसरे नंबर पर रहा। इसके अलावा सहरसा, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, किशनगंज और खगड़िया में भी हजारों मीट्रिक टन मखाने की बंपर पैदावार दर्ज की गई। स्थानीय स्तर पर बेहतर ग्रेडिंग, फ्लेवरिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों की पैकेजिंग मिलने से अब किसानों को बिचौलियों के बजाय सीधे एक्सपोर्टर्स से बेहतर दाम मिल रहे हैं, जिससे इलाके की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed