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कूनो में चीते को गोली लगी या हुआ शिकार? केंद्र ने दिए जांच के आदेश, आरोपियों की तलाश में जुटी टीम

भोपाल  मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के एक नर चीते (KNG22) की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस घटना की मौके पर जाकर जांच करने के लिए एक उच्च-स्तरीय टीम भेजी है। यह जानकारी बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई। केंद्रीय कमेटी…

कूनो में चीते को गोली लगी या हुआ शिकार? केंद्र ने दिए जांच के आदेश, आरोपियों की तलाश में जुटी टीम

भोपाल 
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के एक नर चीते (KNG22) की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस घटना की मौके पर जाकर जांच करने के लिए एक उच्च-स्तरीय टीम भेजी है। यह जानकारी बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।

केंद्रीय कमेटी में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अतिरिक्त निदेशक और क्षेत्रीय उपनिदेशक शामिल हैं। कमेटी मध्य प्रदेश सरकार के साथ समन्वय कर जांच करेगी। बता दें कि इस मामले की जांच के लिए राज्य सरकार पहले ही वन एवं पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए STF गठित कर चुकी है।

प्रोटोकॉल की भी समीक्षा की जाएगी
केंद्र की टीम घटना की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करने के साथ कूनो और आसपास के क्षेत्रों में चीतों की सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण से जुड़े प्रोटोकॉल की भी समीक्षा करेगी। इसी से तय होगा कि चीतों की सुरक्षा के लिए आगे क्या किया जाना है।

टीम में कौन-कौन शामिल हैं? 
इस टीम में वन महानिरीक्षक (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण-एनटीसीए), वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्लूसीसीबी) के अतिरिक्त निदेशक और डब्लूसीसीबी के क्षेत्रीय उप-निदेशक शामिल हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, चीते के शरीर से बंदूक की गोलियां मिलीं, जिसके कारण उसे कई आंतरिक चोटें आईं और फिर उसकी मौत हो गई।

केएनजी22 चीता 25 अक्तूबर को मुरैना के वन क्षेत्र में, कूनो नेशनल पार्क के संरक्षित इलाके के बाहर घायल अवस्था में मिला था। उसी दिन उसे श्योपुर वन प्रभाग से रेस्क्यू किया गया और जबलपुर के पशु चिकित्सा केंद्र में उसका गहन इलाज और इमरजेंसी सर्जरी की गई।

बयान में क्या बताया गया है? 
बयान में आगे कहा गया, 'सर्जरी के दौरान उसके शरीर से बंदूक की पांच गोलियां निकाली गईं। तमाम चिकित्सा प्रयासों के बावजूद, 27 अक्तूबर 2026 को चीते की मौत हो गई।' बयान के मुताबिक, इस टीम का काम चीते की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की गहराई से जांच करना, सभी उपलब्ध सबूतों का परीक्षण करना और मध्य प्रदेश वन विभाग के साथ मिलकर काम करना है, ताकि इस मामले में सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए पहले ही एक विशेष कार्य बल का गठन कर दिया है, जिसमें वन विभाग और पुलिस के अधिकारी शामिल हैं।

मुरैना के जंगल में घायल मिला था चीता
मादा चीता निर्वा के शावक KNG22 को 25 अक्टूबर 2026 को मुरैना जिले के जंगलों में घायल अवस्था में पाया गया था। उसे रेस्क्यू कर श्योपुर वन मंडल के माध्यम से जबलपुर के पशु चिकित्सा केंद्र पहुंचाया गया। वहां गहन उपचार और आपातकालीन सर्जरी के दौरान उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए। चिकित्सकीय जांच में छर्रों से जुड़ी कई आंतरिक चोटों की पुष्टि हुई। 27 अक्टूबर को चीते की मौत हो गई।

मंत्रालय को सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट
केंद्रीय कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट और सुझाव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सौंपेगी। जांच में चीते को गोली लगने की परिस्थितियों और घटना से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। इसके साथ ही कूनो और आसपास के क्षेत्रों में चीतों की सुरक्षा और निगरानी के मौजूदा इंतजामों की समीक्षा होगी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि चीते को गोली किन परिस्थितियों में लगी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट ने केंद्रीय वन मंत्री से मांगा इस्तीफा
वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने चीते की मौत के मामले में केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव से इस्तीफे मांगा है। दुबे ने चीता प्रोजेक्ट के तहत चीतों की संदिग्ध मौत और शिकार की घटनाओं के लिए केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग भी की है।

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