,

भगवंत मान की श्री अकाल तख्त साहिब में पेशी क्यों? जानिए क्या है अकाल तख्त और इसके प्रमुख अधिकार

चंडीगढ़  पंजाब के सीएम भगवंत मान श्री अकाल तख्त साहिब के सामने आज अपना पक्ष रखेंगे. वह पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष के साथ जाएंगे. मान एक वीडियो को लेकर विवाद पर हैं. उन पर गुरु द्रोही औ पंथ विरोधी होने के आरोप हैं. इसके अलावा पंजाब सरकार के ईशनिंदा से…

भगवंत मान की श्री अकाल तख्त साहिब में पेशी क्यों? जानिए क्या है अकाल तख्त और इसके प्रमुख अधिकार

चंडीगढ़ 
पंजाब के सीएम भगवंत मान श्री अकाल तख्त साहिब के सामने आज अपना पक्ष रखेंगे. वह पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष के साथ जाएंगे. मान एक वीडियो को लेकर विवाद पर हैं. उन पर गुरु द्रोही औ पंथ विरोधी होने के आरोप हैं. इसके अलावा पंजाब सरकार के ईशनिंदा से जुड़े एक अधिनियम को भी पंथ की सलाह के बिना पारित किए जाने से नाराजगी है। 

अकाल तख्त के सामने भगवंत मान इससे पहले भी पेश हो चुके हैं, जब उन्होंने वीडियो को फर्जी बताया था. उन्होंने दावा किया था कि वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से बनाया गया है. हालांकि मामले की सुनवाई के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने 15 जून को एक आदेश जारी करते हुए मान को गुरुद्रोही और खालसा पंथ का विरोधी घोषित किया था. ऐसा दावा किया गया है कि फोरेंसिक जांच में वीडियो सही पाया गया है. इसीलिए पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों विधायकों को अकाल तख्त के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। 

श्री अकाल तख्त साहिब क्या है?
श्री अकाल तख्त साहिब सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था है.सरल शब्दों में कहें तो यह सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक और नैतिक अदालत है. यह अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में है और सिखों के पांच तख्तों में सबसे प्रमुख मानी जाती है. इसका अर्थ है अकाल का सिंहासन, जिसका उद्देश्य सिर्फ आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, यह समाज, न्याय और समुदाय से जुड़े मामलों में भी फैसला सुनाता है। 

सिख नेट के मुताबिक जब गुरु हरगोबिंद के पिता और पांचवें सिख गुरु अर्जन देव को मुगल सम्राट जहांगीर ने शहीद करवाया तो उसके जवाब में गुरु हरगोबिंद ने इसकी स्थापना की थी. जब उन्होंने अकाल तख्त के मंच का अनावरण किया था तो उन्होंने दो तलवारें धारण की थीं. इनमें एक आध्यात्मिक शक्ति पीरी का संकेत देती थी ओर दूसरी सांसारिक शक्ति मीरी का. यह पीरी और मीरी दर्शन ही अकाल तख्त की आत्मा है. जो ये विचार देता है कि धर्म और न्याय अलग नहीं हैं. यानी एक हाथ में आस्था और दूसरे में अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति। 

क्या करता है अकाल तख्त?
    अकाल तख्त हुक्मनामा यानी धार्मिक आदेश जारी करता है. यह हुक्मनामा दुनिया भर के सिखों पर लागू होता है। 

    अकाल तख्त सिख हितों के लिए गलत बात करने वाला या हानिकारक कदम उठाने वाले को धार्मिक दंड दे सकती है। 

    तख्त किसी भी व्यक्ति की सेवा या उसके बलिदानों की सराहना भी कर सकता है जो सिख हितों के लिए काम करते हैं। 

    यह सिख समुदाय से जुड़े विवादों और महत्वपूर्ण मामलों पर मार्गदर्शन भी देता है। 

जत्थेदार होता है अकाल तख्त का मुखिया
अकाल तख्त का प्रमुख जत्थेदार ही उसका मुखिया होता है. जत्थेदार को ही दुनिया भर के सिखों का सर्वोच्च प्रवक्ता और प्रमुख माना जाता है. यह एक धार्मिक नेता की तरह होते हैं जिनसे अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त रहें. वर्तमान में कुलदीप सिंह गरगज कार्यवाहक जत्थेदार हैं.इनकी नियुक्त शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से 2025 में की गई थी. हालांकि तकनीकी तौर पर अकाल तख्त एक स्वतंत्र धार्मिक संस्था है। 

अकाल तख्त के सामने बुलाए जाने का अर्थ क्या?
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार अगर किसी को पेश होने का आदेश देते हैं तो यह एक तरह का धार्मिक समन है. जो आरेापी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका देता है. जो भी व्यक्ति इसकी अनदेखी करता है वह सिख समुदाय की नजर में अपनी विश्वसनीयता खो देता है. आरोपी अगर पेश होता है तो उसका पक्ष सुनकर अकाल तख्त फैसला करता है कि उसे क्लीनचिट देनी है या फिर प्रायश्चित का आदेश देना है. इसे तनखाह कहा जाता है. यह धार्मिक दंड है. आम तौर पर तनखाह में सेवा कार्य, सार्वजनिक माफी की सजा दी जाती है। 

सुखबीर सिंह बादल को मिला था धार्मिक दंड

श्री अकाल तख्त साहिब ने 2024 में पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को तनखैया घोषित किया था. उन्हें तनखाह यानी धार्मिक सजा सुनाई गई थी. उन पर आरोप था कि 2007 से 2027 तक पंजाब की शिरोमणि अकाली दल सरकार में कुछ ऐसे फेसले हुए जिनसे पंथक हितों को नुकसान पहुंचा है. इसमें बेअदबी का माला भी शामिल था. सुखबीर सिंह बादल ने अपनी गलतियों के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी. इसके बाद उने तनखाह सुनाई गई थी. उन्हें स्वर्ण मंदिर के बाद सेवादार की वर्दी पहनकर सेवा करनी पड़ी थी। 

अकाल तख्त सबसे ऊपर क्यों?
सिखों के पांच तख्त हैं. तख्त का अर्थ सिंहासन या सत्ता का आसन होता है. यह सिख धर्म का आध्यात्मिक और सांसारिक केंद्र है. पहला केंद्र श्री अकाल तख्त साहिब है, जो अमृतसर में है. दूसरा तख्त श्री केशगढ़ साहिब है जो आनंदपुर साहिब में है. तीसरा तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और चौथा तख्त श्री पटना साहिब तथा पांचवां तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ में है. अकाल तख्त सर्वोच्च इसलिए है, क्योंकि ये पहला तख्त है। 

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports