,

मध्यप्रदेश में हाईवे पर देना पड़ सकता है शुल्क, लागू हुआ नया कानून

भोपाल  मध्यप्रदेश में स्टेट हाईवे के विकास, रखरखाव और संचालन के लिए नया कानूनी ढांचा लागू हो गया है। राज्य सरकार अब स्टेट हाईवे या उसके किसी हिस्से के उपयोग से मिलने वाली सेवाओं और सुविधाओं के बदले यूजर फीस लगा सकेगी। शुल्क की दर और वसूली की प्रक्रिया नियमों के जरिए तय होगी। इसके…

मध्यप्रदेश में हाईवे पर देना पड़ सकता है शुल्क, लागू हुआ नया कानून

भोपाल 

मध्यप्रदेश में स्टेट हाईवे के विकास, रखरखाव और संचालन के लिए नया कानूनी ढांचा लागू हो गया है। राज्य सरकार अब स्टेट हाईवे या उसके किसी हिस्से के उपयोग से मिलने वाली सेवाओं और सुविधाओं के बदले यूजर फीस लगा सकेगी। शुल्क की दर और वसूली की प्रक्रिया नियमों के जरिए तय होगी। इसके साथ ही सरकार हाईवे के विकास और रखरखाव के लिए किसी व्यक्ति या संस्था के साथ समझौता भी कर सकेगी। इसके तहत संबंधित निजी संस्था को तय शर्तों के अनुसार शुल्क वसूलने और उसे अपने पास रखने का अधिकार भी दिया जा सकेगा। यह प्रावधान मप्र राजमार्ग (संशोधन) अधिनियम 2026 में किया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह तत्काल प्रभावी हो चुका है।

संशोधन में मूल मप्र राजमार्ग अधिनियम, 2004 की प्रस्तावना में भी बदलाव किया है। इसमें राजमार्गों से अतिक्रमण रोकने और हटाने के साथ यूजर फीस लगाने का प्रावधान जोड़ा गया है। वहीं सड़क सुरक्षा तथा सड़क परिवहन के सभी साधनों की अधिकतम दक्षता सुनिश्चित करने वाली सुविधाओं को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है।

नए नियम के फायदे
रखरखाव के लिए अतिरिक्त आयः यूजर फीस से हाईवे के विकास और रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधन आसानी से जुटाए जा सकेंगे।

निजी निवेश का रास्ताः विकास और रखरखाव के लिए निजी संस्थाओं के साथ करार होने से पूंजी और तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल भी संभव होगा।

सुविधाओं में सुधारः अतिरिक्त शुल्क से मिलने वाले संसाधनों का उपयोग सड़क की गुणवत्ता. संचालन, सुरक्षा और संबंधित सुविधाओं में किया जा सकता है।

जिम्मेदारी तय करने में मददः करार में निर्माण, रखरखाव, प्रबंधन और संचालन की शर्तें स्पष्ट की जा सकेंगी।

नए नियम को लेकर ये चुनौतियां
वाहन चालकों पर अतिरिक्त बोझः
यूजर फीस से नियमित यात्रियों और मालवाहक वाहनों की यात्रा लागत बढ़ सकती है।

दोहरी फीस की आशंकाःकिसी मार्ग पर पहले से अन्य शुल्क लागू होने की स्थिति में नया शुल्क अतिरिक्त आर्थिक बोझ डॉल सकता है। यह अनिवार्य प्रावधान नहीं, बल्कि संभावित प्रशासनिक चुनौती है।

निजी एजेंसी की निगरानीःशुल्क वसूली का अधिकार निजी संस्था को मिलने पर दर, सेवा की गुणवत्ता और करार की निगरानी जरूरी होगी।

कम ट्रैफिक वाले मार्गः कम यातायात वाले हाईवे निजी निवेश के लिए कम आकर्षक होंगे। ऐसे मार्गों के रखरखाव के लिए सरकार को अलग संसाधन जुटाने पड़ सकते हैं।

सरकार तय करेगी फीस की नई दरें
अधिनियम में नई धारा 8-ए जोड़ी गई है। इसके तहत राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर स्टेट हाईवे के पूरे या किसी हिस्से के उपयोग से संबंधित सेवाओं या लाभों के लिए नियमों में तय दरों पर शुल्क लगा सकेगी। शुल्क की वसूली भी निर्धारित नियमों के अनुसार ही होगी। हालांकि, किस हाईवे पर कितनी फीस लगेगी और किन वाहनों या उपयोगकर्ताओं पर लागू होगी, यह संबंधित नियमों और अधिसूचनाओं से स्पष्ट होगा।

वहीं नई धारा 8-बी के तहत सरकार को स्टेट हाईवे के पूरे या किसी हिस्से के विकास और रखरखाव के लिए किसी व्यक्ति या संस्था से समझौता करने का अधिकार मिला है। करार की शर्तों के तहत संबंधित संस्था को सेवाओं या सुविधाओं के बदले शुल्क वसूलने और अपने पास रखने का अधिकार दिया जा सकता है। संशोधन अधिनियम के तहत मध्यप्रदेश राजमार्ग अधिनियम, 1936 और भारतीय टोल (मध्यप्रदेश संशोधन) अधिनियम, 1932 को निरस्त कर दिया गया है। हालांकि पहले जारी अधिसूचनाएं, निर्धारित यूजर फीस. रियायत समझौते, लाइसेंस, प्राधिकरण और शुल्क वसूलने से जुड़े अधिकार तत्काल खत्म नहीं होंगे।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports