ग्वालियर
शादी के बाद पत्नी का भरण-पोषण करना पति का न केवल नैतिक, बल्कि अनिवार्य कानूनी दायित्व है। हाईकोर्ट ने एकल पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पति स्वस्थ और काम करने में सक्षम है, तो वह यह कहकर गुजारा भत्ता देने से नहीं बच सकता कि उसकी आय कम है या वह बेरोजगार है। जस्टिस अमित सेठ की एकल पीठ ने पति और पत्नी दोनों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को यथावत रखा है।
मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर
दरअसल शबीना व शाहिद (दोनों के परिवर्तित नाम) का निकाह नवंबर 2019 में मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुआ था। पत्नी का आरोप था कि निकाह के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उसे मायके में शरण लेनी पड़ी। पत्नी ने फैमिली कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि उसका पति मैकेनिक है और 30 हजार रुपए महीना कमाता है, इसलिए उसे भरण पोषण दिलाया जाए।
दूसरी ओर पति ने कोर्ट में दलील दी कि वह मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर है और उसकी मासिक आय केवल 5,000 रुपए है। उसने दलील दी कि इतनी कम आय में वह 4,000 रुपए गुजारा भत्ता नहीं दे सकता। वहीं पत्नी ने गुजारा भत्ता की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
दिक्कतें अपनी जगह, हक अपनी जगह
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 125 सीआरपीसी का उद्देश्य महिला को दर-दर भटकने से बचाना और उसे गरिमापूर्ण जीवन देना है। यदि पति शारीरिक रूप से स्वस्थ है, तो उसे एक ‘अकुशल श्रमिक’ के बराबर कमाकर पत्नी को पैसा देना ही होगा।
पति ने अपनी सही आय के पुख्ता सबूत नहीं दिए, इसलिए फैमिली कोर्ट द्वारा कलेक्टर रेट (न्यूनतम मजदूरी) के आधार पर 4,000 रुपए का अंतरिम गुजारा भत्ता तय करना पूरी तरह उचित है।
क्या होता है गुजारा भत्ता
जानकारी के लिए बता दें कि गुजारा भत्ता (Alimony/Maintenance) तलाक या अलग होने के बाद एक पति/पत्नी द्वारा दूसरे को दी जाने वाली कानूनी और वित्तीय सहायता है। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर साथी को विवाह के दौरान की जीवनशैली बनाए रखने में मदद करना है। यह राशि अदालत द्वारा या आपसी सहमति से तय की जा सकती है।
ये भी जानें
-मुख्य उद्देश्य तलाक के बाद आर्थिक असमानता को दूर करना।-यह स्थायी (जीवनभर) या अस्थायी (पुनर्वास के लिए) हो सकता है।
-यह आमतौर पर पति की आय का 25-33% हो सकता है, जो पति-पत्नी की संपत्ति, उम्र और वैवाहिक अवधि पर निर्भर करता है।
-यह आमतौर पर प्राप्तकर्ता के पुनर्विवाह करने या मौत होने तक जारी रहता है।
पुरुष पल्ला नहीं झाड़ सकता…’, हाईकोर्ट ने गुजारा-भत्ता के मामले में दिया बड़ा फैसला
ग्वालियर शादी के बाद पत्नी का भरण-पोषण करना पति का न केवल नैतिक, बल्कि अनिवार्य कानूनी दायित्व है। हाईकोर्ट ने एकल पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पति स्वस्थ और काम करने में सक्षम है, तो वह यह कहकर गुजारा भत्ता देने से नहीं बच सकता कि उसकी आय कम है…

Previous Post
Next Post
Latest News

Stay Connected
Categories
featured pb pu s top-news Uncategorized इंदौर उत्तर प्रदेश खेल ग्वालियर छत्तीसगढ़ जबलपुर देश धर्म ज्योतिष पंजाब बिलासपुर बिहार/झारखण्ड बिज़नेस भोपाल मध्य प्रदेश मनोरंजन राजनीतिक राजस्थान राज्य रायपुर लाइफस्टाइल विदेश हरियाणा
Tags
8th Pay Commission Accident Amit Shah arun Astrology BJP Chief Minister Dr. Yadav CM Sai CM yogi court Election featured gold High Court india jobs lpg modi Mohan Monsoon PM Modi police Punjab Rahul Gandhi Railway rain Rashifal Recipe road school SIR Stock Market Supreme Court top-news train Trump vastu tips vijay vishnu Vishnu Deo Sai Voter list water Weather yogi Yogi government
About the Author

GoodDoo News
Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives
Access over the years of investigative journalism and breaking reports
You May Have Missed












